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Friday, 22 August 2025

प्रेरणा पोर्टल” पर विभाग से प्राप्त टैबलेट/सिम जानकारी भरने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

*प्रेरणा पोर्टल” पर विभाग से प्राप्त टैबलेट/सिम जानकारी भरने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:*👇

* *1. अपने टैबलेट में *#06# डायल करें।*

_स्क्रीन पर IMEI दिखेगा; IMEI 1नोट कर लें।_

* 2. ब्राउज़र में prernaup.in टाइप करके होम पेज खोलें।

* 3. *Bank Data Upload* सेक्शन में जाएँ और *Teachers Login* पर क्लिक करें।

* 4. *New Registration 2025-26* चुनें।

* 5. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें, OTP भरें, और *Login पर क्लिक करें।*

* 6. स्क्रीन के बाएँ मेन्यू से *टैबलेट/सिम इनफार्मेशन* पर क्लिक करें।

* 7. पूछे गए प्रश्न *“क्या आपके विद्यालय में टैबलेट प्राप्त हुए हैं?”* में:

_यदि मिले हैं तो हाँ (Yes) चुनें, नहीं मिले तो नहीं (No) चुनें।_

* 8. हाँ चुनने पर, *आपके विद्यालय को जितने टैबलेट मिले हैं वही संख्या चुनें।*

* 9. अब प्रत्येक टैबलेट के लिए नीचे दी जानकारी भरें:

IMEI नंबर 
SIM नंबर 
SIM कंपनी का नाम (जैसे Jio/Airte)

* 10. सारी प्रविष्टियाँ ध्यान से जाँच लें (अंकों में स्पेस/डैश न दें), फिर *Save/Submit* पर क्लिक करें।

Sunday, 17 August 2025

LT Grade 2017 और TET विवाद – न्यायालय का निर्णय

LT Grade 2017 और TET विवाद – न्यायालय का निर्णय
मामला

याचिकाकर्ता Mohd. Tasleem व अन्य ने दिनांक 21.12.2016 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी थी। इस विज्ञापन में 9342 L.T./Trained Graduate Teacher पदों की भर्ती का उल्लेख था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूँकि ये पद कक्षा 6 से 10 तक पढ़ाने के लिए हैं, इसलिए इसमें TET (Teacher Eligibility Test) को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया जाना चाहिए था।

राज्य सरकार का पक्ष:

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह भर्ती केवल कक्षा 9 और 10 के लिए है, न कि कक्षा 6 से 8 के लिए।
चूँकि TET की अनिवार्यता सिर्फ कक्षा 6 से 8 की नियुक्तियों पर लागू होती है, इसलिए यहाँ TET आवश्यक नहीं है।

न्यायालय का निष्कर्ष:
विज्ञापन केवल कक्षा 9-10 के लिए मान्य है।
TET की आवश्यकता कक्षा 6-8 में होती है, इसलिए यहाँ विवाद का कोई आधार नहीं है।
परिणामस्वरूप, याचिका को निस्तारित/खारिज कर दिया गया।

👉 यह आदेश दिनांक 28 फरवरी 2017 को मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी. भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने पारित किया।

👇👇👇👇👇
विशेष टिप्पणी 

 अपनी बात सबूत और तथ्यों के साथ रखते हैं।

LT Grade 2017 में उठे इस विवाद को कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया।


आप चाहें तो पूरा जजमेंट पढ़ सकते हैं।
इसलिए आप पूरी तरह निश्चिंत होकर अपनी Answer Writing और तैयारी पर ध्यान दें।

✨ साफ संदेश: LT Grade भर्ती में TET की कोई अनिवार्यता नहीं है।

Wednesday, 13 August 2025

इंचार्ज हेड शिक्षकों को मिले पद के अनुसार वेतन और एरियर : सुप्रीम कोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
- 173 पेज की SLP दायर करते हुए मुख्य तर्क दिए:
  1. किसी भी शिक्षक को प्रशासनिक आदेश से प्रधानाध्यापक का चार्ज नहीं दिया गया 
  2. RTE Act, 2009 की धारा 25 के अनुसार कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में प्रधानाध्यापक की आवश्यकता ही नहीं 
  3. U.P. Basic Education Act, 1972 में इंचार्ज/ऑफिसिएटिंग प्रधानाध्यापक नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं 

सुप्रीम कोर्ट में दिलचस्प सुनवाई:

कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ-
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के तर्कों को निम्नलिखित शब्दों में खारिज किया:

>शिक्षकों का शोषण बंद कीजिए! हमारे देश का शिक्षा तंत्र पहले ही सबसे खराब स्थिति में है, और आप बिना हेड टीचर्स के विद्यालय चला रहे हैं!"

मुख्य बहस के बिंदु-
1. नियमावली का प्रावधान*: शिक्षकों की ओर से पेश अधिवक्ता ने नियमावली के पेज 70, पैराग्राफ 6 का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि सीनियर-मोस्ट शिक्षक से हेडमास्टर का कार्य लिया जाएगा।
2. कार्य और वेतन का संबंध: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति उच्च पद का कार्य कर रहा है तो उसे उस पद का वेतन मिलना चाहिए।
3. प्रशासनिक लापरवाही: कोर्ट ने सरकार से पूछा कि यदि नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति नहीं हो रही है, तो इंचार्ज हेडमास्टरों को प्रमोशन क्यों नहीं दिया जा रहा? 

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय (13 अगस्त 2025)

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में:

1. SLP खारिज की और हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
2. वेतन समानता* का सिद्धांत स्थापित किया कि कार्य के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए,
3. बकाया राशि देने का निर्देश दिया, जो 31 मई 2014 से देय होगी,
4. शोषण रोकने के लिए सरकार को कड़ा संदेश दिया 

निर्णय के व्यापक प्रभाव:

शिक्षकों पर प्रभाव-
- लगभग *50,000+ इंचार्ज हेडमास्टरों को लाभ
- 6-8 वर्षों का बकाया वेतन मिलेगा
- मनोबल बढ़ने से शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की संभावना

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव-
- राज्य सरकार को अब या तो:
  - नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति करनी होगी *या*
  - इंचार्ज हेडमास्टरों को पूरा वेतन देना होगा
- विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी
- शिक्षकों के अधिकारों के प्रति जागरूकता 

 न्यायिक महत्व-
- *"कार्य के अनुरूप वेतन"* का सिद्धांत स्थापित
- सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों की मजबूत न्यायिक सुरक्षा
- भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल

🚨लंबित मुद्दे और भविष्य की चुनौतियाँ-

वित्तीय बोझ-
- राज्य सरकार पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ
- बकाया वेतन का भुगतान कैसे होगा, यह एक बड़ा सवाल?

प्रशासनिक सुधार-
- नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता
- TET योग्यता संबंधी विवादों का समाधान 

 निष्कर्ष: एक न्यायिक क्रांति-

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: इंचार्ज हेडमास्टरों को मिलेगा पूरा वेतन और बकाया


*📜 परिचय: एक न्यायिक मील का पत्थर*

13 अगस्त 2025 का दिन उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों इंचार्ज हेडमास्टरों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें इंचार्ज हेडमास्टरों को हेडमास्टर के समान वेतन देने का निर्देश दिया गया था। यह निर्णय न केवल शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय का नया मानदंड भी स्थापित करता है। 👨‍⚖️📚

* ⚖️ *मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि*

*📌 मूल विवाद का सार*
- उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सहायक अध्यापकों को "इंचार्ज हेडमास्टर" का दायित्व सौंपा गया
- ये शिक्षक हेडमास्टर के सभी कार्य करते थे, लेकिन उन्हें केवल सहायक अध्यापक का वेतन मिलता था
- त्रिपुरारी दुबे और अन्य शिक्षकों ने इस अन्याय के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया 

*🏛️ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश (30 अप्रैल 2025)*
- इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया: *"कार्य के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए"*
- निर्णय में कहा गया कि यदि कोई शिक्षक हेडमास्टर की जिम्मेदारी निभा रहा है, तो उसे उस पद का वेतन मिलना चाहिए
- कोर्ट ने राज्य सरकार को इन शिक्षकों को हेडमास्टर के वेतनमान और बकाया राशि देने का निर्देश दिया 

 🔄 *राज्य सरकार की प्रतिक्रिया*
- उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
- 173 पेज की SLP दायर करते हुए मुख्य तर्क दिए:
  1. किसी भी शिक्षक को प्रशासनिक आदेश से प्रधानाध्यापक का चार्ज नहीं दिया गया 
  2. RTE Act, 2009 की धारा 25 के अनुसार कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में प्रधानाध्यापक की आवश्यकता ही नहीं 
  3. U.P. Basic Education Act, 1972 में इंचार्ज/ऑफिसिएटिंग प्रधानाध्यापक नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं 

🏛️ *सुप्रीम कोर्ट में दिलचस्प सुनवाई*

👨‍⚖️ *कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ*
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के तर्कों को निम्नलिखित शब्दों में खारिज किया:

> *"शिक्षकों का शोषण बंद कीजिए! हमारे देश का शिक्षा तंत्र पहले ही सबसे खराब स्थिति में है, और आप बिना हेड टीचर्स के विद्यालय चला रहे हैं!"*

🔍 *मुख्य बहस के बिंदु*
1. *नियमावली का प्रावधान*: शिक्षकों की ओर से पेश अधिवक्ता ने नियमावली के पेज 70, पैराग्राफ 6 का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट उल्लेख था कि सीनियर-मोस्ट शिक्षक से हेडमास्टर का कार्य लिया जाएगा।
2. *कार्य और वेतन का संबंध*: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति उच्च पद का कार्य कर रहा है तो उसे उस पद का वेतन मिलना चाहिए।
3. *प्रशासनिक लापरवाही*: कोर्ट ने सरकार से पूछा कि यदि नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति नहीं हो रही है, तो इंचार्ज हेडमास्टरों को प्रमोशन क्यों नहीं दिया जा रहा? 

✍️ *सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय (13 अगस्त 2025)*

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में:

1. *SLP खारिज* की और हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा ✅
2. *वेतन समानता* का सिद्धांत स्थापित किया कि कार्य के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए 💰
3. *बकाया राशि* देने का निर्देश दिया, जो 31 मई 2014 से देय होगी 📅
4. *शोषण रोकने* के लिए सरकार को कड़ा संदेश दिया ⚠️ 

📊 *निर्णय के व्यापक प्रभाव*

 👩‍🏫 *शिक्षकों पर प्रभाव*
- लगभग *50,000+* इंचार्ज हेडमास्टरों को लाभ
- *6-8 वर्षों* का बकाया वेतन मिलेगा
- मनोबल बढ़ने से शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की संभावना 📈

🏫 *शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव*
- राज्य सरकार को अब या तो:
  - नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति करनी होगी *या*
  - इंचार्ज हेडमास्टरों को पूरा वेतन देना होगा
- विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी
- शिक्षकों के अधिकारों के प्रति जागरूकता 🌟 

 ⚖️ *न्यायिक महत्व*
- *"कार्य के अनुरूप वेतन"* का सिद्धांत स्थापित
- सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों की मजबूत न्यायिक सुरक्षा
- भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल 👨‍⚖️

🚨 *लंबित मुद्दे और भविष्य की चुनौतियाँ*

💰 *वित्तीय बोझ*
- राज्य सरकार पर *करोड़ों रुपये* का अतिरिक्त वित्तीय बोझ
- बकाया वेतन का भुगतान कैसे होगा, यह एक बड़ा सवाल ❓

🏛️ *प्रशासनिक सुधार*
- नियमित हेडमास्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता
- TET योग्यता संबंधी विवादों का समाधान 

 📝 *निष्कर्ष: एक न्यायिक क्रांति*

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि पूरे देश में कार्य और वेतन की समानता के सिद्धांत को मजबूती प्रदान करता है। यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ✊

कोर्ट की यह टिप्पणी कि *"शिक्षकों का शोषण बंद कीजिए"* सभी राज्य सरकारों के लिए एक सबक है कि वे शिक्षकों के अधिकारों का सम्मान करें और उन्हें उनके योगदान के अनुरूप पारिश्रमिक दें। शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं, और उनके साथ न्याय होना हर सभ्य समाज का कर्तव्य है। 🇮🇳📚

> *"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।"*  
> - संत कबीर

यह निर्णय वास्तव में गुरुओं (शिक्षकों) के प्रति हमारे समाज के ऋण को चुकाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

Thursday, 13 February 2025

मिड डे मील (MDM)/ पीएम पोषण योजना की परिवर्तन लागत की दरें शुरू से अब तक

प्राथमिक विद्यालय हेतु परिवर्तन लागत*
==================
नवंवर 2010 से मार्च 2011 = 2.69 रुपये

अप्रैल 2011 से मई 2012 = 2.89 रुपये

जुलाई 2012 से मई 2013 = 3.11 रुपये

जुलाई 2013 से मई 2014 = 3.34 रुपये

जुलाई 2014 से जून 2015 = 3.59 रुपये

जुलाई 2015 से 3 जनवरी 2016 = 3.76 रुपये

4 जनवरी 2016 से जून 2016 तक =3.86 रुपये

जुलाई 2016 से 14 नवम्बर 2018 तक = 4.13 रुपये

15 नवंबर 2018 से जून 2019 तक = 4.35 रुपये

जुलाई 2019 से मार्च 2020 तक = 4.48 रुपये

अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2022 तक  = 4.97 रुपये

01 अक्टूबर 2022 से 30 नवम्बर 2024 तक= 5.45 रुपये

01 दिसंबर से 2024 से ....अब तक= 6.19 रुपये

*जूनियर विद्यालय हेतु  परिवर्तन लागत*
===================
नवंवर 2010 से मार्च 2011 = 4.04 रुपये

अप्रैल 2011 से मई 2012 = 4.33 रुपये

जुलाई 2012  से  मई 2013 = 4.65 रुपये
 
जुलाई 2013 से मई 2014 = 5.00 रुपये

जुलाई 2014 से जून 2015 = 5.38 रुपये

जुलाई 2015 से 3 जनवरी 2016 = 5.64  रुपये

4 जनवरी 2016 से जून 2016 तक = 5.78 रुपये

जुलाई 2016 से 14 नवम्बर 2018 तक = 6.18 रुपये

15 नवंबर 2018 से जून 2019 तक = 6.51रुपये

जुलाई 2019 से मार्च 2020 तक = 6.71 रुपये

अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2022 तक = 7.45 रुपये

01 अक्टूबर 2022 से 30 नवम्बर 2024 तक= 8.17 रुपये

01 दिसंबर से 2024 से ....अब तक= 9.29 रुपये

Thursday, 21 November 2024

PFMS Flow Chart

*PFMS संबंधी FLOW CHART*
👇👇👇👇👇👇👇👇👇

==============
 *CREATE VENDOR*
==============
*PFMS पोर्टल पर वेंडर बनाने की प्रक्रिया को निम्न flow chart से समझें*

DO Login
|
Click on Master
|
Click on Vendor
|
Click on Manage/Add New
(Add New पर क्लिक करने पर नई विंडो खुलेगी जिसमें नए वेंडर की datail भरकर वेंडर जोड़ सकते हैं या Manage पर क्लिक करके भी निम्न प्रोसेस करनी होगी)
|
Click Search criteria box
|
Select Vendor Not Mapped With Me
|
Click Search
|
Type in box Vendor Name or Unique Code or A/C No
|
Click Search
|
Click Check Box
|
Click Map Vendor

*उक्त प्रक्रिया से आप वेंडर क्रिएट कर सकते हैं*

================
 *CREATE EXPENDITURE*
=================
*PFMS पोर्टल पर Expenditure बनाने की प्रक्रिया को निम्न flow chart से समझें*

DO Login
|
Click Expenditure
|
Click Add New
|
Scheme Select
(UP113 Samgra Shiksha)
|
Click Bank A/C Box
|
Click Expenditure Done For Vendor
|
Vendor Name(Click Vendor)
|
Letter/Office order no(Letter Attach and upload)
|
Fill Sanction and actual Transaction date
|
Fill Total Amount
|
Fill Narration
|
Select Scheme Component Code
|
Select Expense Type(Revenue)
|
Fill Amount
|
Click on Add
|
Select Check Box
|
Click on Save
|
Voucher no generate(Click OK)
|
THEN CLICK on YES
|
Instrument Type box(Select E-payment print advice)
|
Click on Add
|
Fill Narration
|
Deduction Detail(No)
|
Click On Confirm
|
Submit for Approval

   *उक्त प्रक्रिया से एक्सपेंडिचर तैयार हो जाएगा और उसके बाद DA LOGIN से Approval के बाद PPA तैयार करना होगा।*

============
*CREATE PPA*
============
*PFMS पोर्टल पर PPA तैयार करने की प्रक्रिया को निम्न flow chart से समझें*

DA Login
|
Click Expenditure
|
Click Approve
|
Select Scheme
(UP113 Samagra Shiksha)
|
Click on Search
|
Click On Letter No
(Expenditure Details Open)
|
Click Approve
|
Type Approved in Remark Box
|
Click On Approved
|
Click On Print Payment Advice
(PPA GENERATE AND PRINT)

  *उक्त प्रक्रिया से PPA तैयार कर सकते हैं*

✍️

Saturday, 12 October 2024

पारिवारिक पेंशन*

*पारिवारिक पेंशन*

_बेसिक में कार्यरत सभी शिक्षकों के पेंशन सम्बन्धित सवालों के जवाब_


*प्रश्न:1. यदि बेसिक में कार्यरत शिक्षक की नियुक्ति के 10 दिन बाद किसी कारणवश डेथ हो जाती है ,तो क्या उसके परिवार को पेंशन मिलेगी?*

उत्तर: हाँ, पारिवारिक पेंशन कर्मचारी के आश्रित को अवश्य मिलेगी।

*प्रश्न:2. क्या पारिवारिक पेंशन के लिए शिक्षक का  NPS कटना अनिवार्य है?*


*_उत्तर: पारिवारिक पेंशन शिक्षक के आश्रित को हर हाल में मिलेगी,चाहे NPS कट रहा हो या नही।_*

प्रश्न:3 सेवाकाल के दौरान किसी शिक्षक की मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति किस पद पर देय है?

उत्तर: सेवाकाल के दौरान किसी भी शिक्षक की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को निम्न नियम के अनुसार नियुक्ति मिलेगी..

(A) यदि आश्रितडीएलएड और प्राथमिक TET/CTET पास है तो उसे प्राथमिक में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति मिलेगी।
*बीएड धारक को अब प्राथमिक में सहायक अध्यापक के पद पर पात्र नही समझा जाता है।*

(B) यदि आश्रित उपरोक्त योग्यता नही रखता है तो उसे विभाग में ही अनुचर पद पर नियुक्ति दी जाएगी,चाहे योग्यता कुछ भी हो।

नोट: कुछ साथियों का कहना है कि जल्द ही इंटर पास  आश्रितों को लिपिक पद पर नियुक्ति दी जाएगी। इस बारे में मेरा मत यही है कि बहुत दिन से ऐसी चर्चा है ,लेकिन अभी तक ऐसा कोई शासनादेश नही आया है। इसमें एक बाधा यह भी है कि पहले से ही स्नातक ,परास्नातक पास  अनुचर पद पर अनुकम्पा नियुक्ति में हैं ,जब तक उन्हें भी लिपिक पद पर प्रोन्नत नही किया जाएगा तब तक यह दिवास्वप्न ही है। लिपिक पद बेसिक में बहुत सीमित मात्रा में हैं और अनुकम्पा नियुक्ति वाले बहुत अधिक हैं।


प्रश्न :4 यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं तो किसी एक की सेवाकाल में मृत्यु होने पर क्या आश्रित पुत्र या पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति मिलेगी?

उत्तर: *चूंकि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं ,इसलिए आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति नही मिलेगी। हालांकि पारिवारिक पेंशन अवश्य मिलेगी।*

प्रश्न:5 यदि आश्रित स्नातक है और वह डीएलएड और  प्राथमिक टेट/CTET पास करके क्या शिक्षक पद पर नियुक्ति कुछ वर्षों बाद पा सकता है?

उत्तर: *हां, 5 साल तक होल्ड पर रख सकते हैं,याद रखें ये अनुकम्पा नियुक्ति है ,आपका अधिकार नही। इसलिए अनुकम्पा नियुक्ति में जितना जल्द हो सके आवेदन कर देना चाहिए।*

*प्रश्न:6 सेवाकाल में मृत्यु होने पर  पारिवारिक पेंशन का निर्धारण किस प्रकार होता है?*

उत्तर: पारिवारिक पेंशन का निर्धारण निम्न प्रकार से होता है....

(A) यदि सेवा के 7 वर्ष या उससे अधिक हो गए हैं तो आश्रित को दिवंगत शिक्षक के मूल वेतन का 50 प्रतिशत+ वर्तमान DR देय होगा । यह मूल व्वेटन 50 प्रतिशत केवल 10 वर्ष तक ही देय होगा। 10 वर्ष बाद यह 50 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत रह जायेगा।


(B) यदि सेवा के 7 वर्ष से कम हुए हैं तो आश्रित को दिवंगत शिक्षक के मूल वेतन का 30 प्रतिशत+ वर्तमान DR  देय होगा।
*नोट:  वर्ष में दो बार DR बढ़ता है। इसलिए पेंशन भी प्रत्येक 6 माह पर बढ़ जाती है।*

प्रश्न :7 सेवाकाल के दौरान  60 वर्ष से पहले यदि किसी शिक्षक की मृत्यु होने पर आश्रित को कौन कौन से लाभ देय हैं?
उत्तर: 
A. अनुकम्पा नियुक्ति
B.डेथ ग्रेच्युटी 

C. सामूहिक बीमा कटौती का लाभ (यदि नियुक्ति 1 अप्रैल 2014 के पहले की है)

D.पारिवारिक पेंशन

*प्रश्न:8 यदि सेवा के दौरान किसी शिक्षक की मृत्यु हो गयी हो ,तो आश्रित को वर्तमान समय मे लिपिक पद पर नियुक्ति के लिए प्रतीक्षा करनी चाहिए या नही?*

*उत्तर: इस बारे में भिन्न भिन्न शिक्षकों का मत भिन्न-भिन्न हो सकता है ,लेकिन जहां तक मेरी राय है ,अनुकम्पा नियुक्ति को अधिक समय तक टाला नही जाना चाहिए ,बल्कि अनुचर पद पर नियुक्ति ले लेनी चाहिए।*

*प्रश्न 9 सेवाकाल के दौरान किसी शिक्षक की मृत्यु होने पर आज न्यूनतम कितनी पेंशन बनेगी?*

*उत्तर: इसका उत्तर इस उदाहरण से समझिए ,जैसे यदि किसी शिक्षक को जुलाई 2023 में  प्राथमिक में नियुक्ति मिली है ,और अगस्त 2023 में उसकी किसी कारणवश असामयिक मृत्यु हो गयी तो उसके आश्रित को पेंशन बनेगी=*
मूल वेतन 35400 का 30%+ DR= 10620+ 10620 का 50%= 10620+5310=  *15930 रुपये प्रति माह*

Sunday, 17 March 2024

Thursday, 25 January 2024

अंतः जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में अब स्थानांतरित होंगे BLO/अवकाश शिक्षक आदि जारी हुआ आदेश

अंतः जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में अब स्थानांतरित होंगे BLO/अवकाश शिक्षक आदि जारी हुआ आदेश