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Wednesday, 22 May 2019

29334 गणित/विज्ञान शिक्षक भर्ती का विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट , दाखिल हुई नई याचिका



29334 गणित/विज्ञान  शिक्षक भर्ती में रिक्त पदों को भरने की मांग को ले कर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल हुई की गई है


Wednesday, 22 August 2018

UPTET - B.Ed. एपीयरिंग केस की अगली सुनवाई 25 सितंबर को , जानिए विभिन्न पक्षो द्वारा 20 अगस्त 18 की सुनवाई का हाल

सुप्रीम कोर्ट अपडेट दिनांक 20 अगस्त  2018*: _टेट-11 बीएड-12 व_10 -11 प्रकरण

💐सभी साथियों को विशाल कुमार लाम्बा का नमस्कार🙏🏻

आज अपने *बीएड टेट  एपीयरिंग मुद्दे पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की अरुण मिश्रा व इंद्रा बनर्जी की डबल बेंच में आज आइटम न0- 11 पर सुनवाई होगी* इसीलिए मैं और मेरे साथी सुप्रीम कोर्ट मौजूद रहे आज थोड़ी देर सुनवाई हुई जिसमें जज साहब ने स्टे कन्फर्म करते हुए 25 सितंबर फाइनल डिस्पोजल पर केस लगा दिया है ।

जिसके लिए हमारी टीम के सीनियर अधिवक्ता  हर तरीके से तैयार बैठे थे कोर्ट में ।
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आज हमारी तरफ से

1. कोलिन गोन्सालवस ( *मानवाधिकार मामलो केके विश्वविख्यात अधिवक्ता व सीनियर अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट*)

2. आर0 बी0 सिंघल0 ( *पूर्व अडिशनल सॉलिसिटर जनरल व यूनियन व NCTE वकील रह चुके है व सीनियर अधिवक्ता*)

3. वेकेंट रमणी सीनियर अधिवक्ता सर्विस मैटर ...

कोर्ट में उपस्तिथ रहे ।

सत्यमेव जयते ।
आपके संघर्षो का साथी
*विशाल कुमार लाम्बा*
मिशन सुप्रीम कोर्ट बीएड एपीयरिंग मुद्दा

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Ⓜमोर्चा परिवारⓂ
        *29334*
      *सुप्रीम कोर्ट*
साथियो नमस्कार----

माननीय सुप्रीम कोर्ट मे आज टेट अपीरिंग/पर्सुइंग मुद्दे से संवंधित मोर्चा की योजित याचिकाओं की सुनवाई *कोर्ट नं 08 माननीय न्यायधीश अरुण मिश्रा और इंदिरा बनर्जी बेंच मे आइटम नं-11* पर सुनवाई हुई.....हाइकोर्ट के आदेश पर आज स्टे हुआ।

मोर्चा के द्वारा किये गए वरिष्ठ वकीलो ने बहस प्रारम्भ की,...ncte की तरफ से वकील राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि इस मेटर पर जबाब लगाने के लिए समय दे। साथ ही कहा as much as 4 week तब जज अरुण मिश्रा जी हँसे और बोले as less four week बोलो।कोर्ट ने सबसे पहले सूरी से पुछा फिर P n मिश्र जी से पुछा ।
राज्य सरकार की तरफ से पुछा और कौन पार्टी है तब स्टेट ने कहा बोर्ड ऑफ़ बेसिक एजुकेशन।
ncte और बोर्ड की प्रेयर पर अगली तारीख 25 sepetmber फाइनल डिस्पोजल के लिए लगा दी साथ मे आज मोर्चा और अनिल मौर्य टीम के बकील की बजह से आज हाइकोर्ट के आदेश पर स्टे हुआ।

(1) सीनियर वकील
      पीo एन o मिश्रा
*(सरकार द्वारा कई मुकदमो मे पैरवी एवं कई महत्वपूर्ण मुकदमो मे पैरवी)*
(2) सीनियर वक़ील
      किरण सूरी
*महिला वरिष्ठ अधिवक्ता*
*कई महत्वपूर्ण मुकदमो मे पैरवी एवं बेंच मे महिला जज भी होने के कारण*

*अगली तारीख 25 sep*
*फाइनल डिस्पोजल*

शेष कल
        विस्तार से..

*स्वस्थ रहें*
       *मस्त रहें*
आपका साथी
       Ⓜमोर्चा परिवार💯
धन्यवाद--
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⛔ *टीम संघ एवं बीटीसी एसोसिएट्स सुप्रीम कोर्ट अपडेट दिनांक 20 अगस्त  2018*: _टेट-11 बीएड-12 व_10 -11 प्रकरण

*ओम नारायण तिवारी,*✍🏼✍🏼....
               आज कोर्ट नंबर 8 में आइटम नंबर 11 पर ओंकार सिंह की याचिका के साथ टीम संघ और बीटीसी सहयोगी टीम की कुल 4 याचिकाएं सुनवायी हेतु लिस्टेड थी ओंकार सिंह, टीम संघ और बीटीसी सहयोगी की तरफ से सीनियर अधिवक्ता *वी शेखर साहब, डॉ कोलिन गोंजाल्विस साहब और आर बी सिंघल साहब कोर्ट में उपस्थिति थे,* चूँकि विपक्षी पक्ष में किसी भी रेस्पोंडेंट का काउंटर नहीं आया था इसलिए आज केस में बहस की संभावना भी कम थी और उसी अनुमान के अनुसार 3 से 4 मिनट की संछिप्त बहस में योजना अनुसार टीम और साथी अपना मकसद प्राप्त करने में कामयाब रहे *आज की कोर्ट की कार्यवाही में हमारी मुख्य कामयाबी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 30 मई 2018 के आदेश पर स्थगन (स्टे) प्राप्त करना रहा|*

ओंकार सिंह, टीम संघ एवं बीटीसी सहयोगी टीम के द्वारा प्रायोजित याचिकाएं👇👇

👉1. *ओंकार सिंह एंड अदर्स*

👉2. *विशाल कुमार*
*(लाम्बा) एंड अदर्स*

👉3. *प्राची सिह एंड अदर्स*

👉4. *आवेश विक्रम सिंह*

👉5. *आशीष पांडेय एंड अदर्स*

आज हुई सुनवायी में  खंड़पीठ ने सभी विपक्षियों को काउंटर सबमिट करने को कहा तथा 25 सितंबर 2018 की तारीख केस के निस्तारण के लिए बहस हेतु निर्धारित की।
📌 *विशेष*- _29334 गणित विज्ञानं अध्यापकों और बीटीसी साथियों की पैरवी दिन प्रतिदिन इतनी मजबूत होती जा रही है कि विरोधी का टिकना अब नामुमकिन है और भविष्य में 29334 के साथ बीटीसी साथियों का जो बवंडर बनेगा विरोधी सुप्रीम कोर्ट से उस बवंडर में उड़कर अपने अपने गृह जनपद में जाकर गिरेंगे यह आप निश्चित मानिये।_

आप सभी से इसी वादे के साथ कि...
*★आजीविका और मान सम्मान से कोई समझौता नहीं।*

⚜ *उ0 प्रा0 शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश टीम*⚜

Saturday, 14 July 2018

प्रदेश के 50,000 प्राथमिक अध्यापकों को मिली राहत

प्रदेश के 50,000 प्राथमिक अध्यापकों को मिली राहत

उत्तर प्रदेश के करीब 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। फिलहाल उनकी नौकरी नहीं जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिक्षकों की याचिका पर नेशनल काउंसिल आफ टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) व उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 30 मई को दिए गए फैसले में कहा था कि जिन लोगों का टीईटी रिजल्ट पहले आया और बीएड या बीटीसी का रिजल्ट बाद में आया उनका टीईटी प्रमाणपत्र वैध नहीं है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उन्हें नौकरी से बेदखल करें। हाईकोर्ट ने ये प्रक्रिया दो महीने में पूरी करने को कहा था। दो महीने की समय सीमा 30 जुलाई को खत्म हो रही थी। उत्तर प्रदेश के करीब 550 प्राथमिक शिक्षकों ने तीन याचिकाओं के जरिये हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरुण मिश्र व न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने याचिकाओं पर आर वेंकट रमणी व रूपाली चतुर्वेदी की दलीलें सुनने के बाद एनसीटीई और उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में याचिका का जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने अंतरिम तौर पर हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये। इससे पहले वकीलों की बहस सुनकर न्यायाधीश अरुण मिश्र ने कहा कि इस पूरे मामले में एनसीटीई के नियमों में दिये गये शब्द पसरुइँग (करते रहना) की व्याख्या जरूरी है ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे। ये सारा विवाद एनसीटीई के नियम 5(1) व 5(2) की व्याख्या से जुड़ा है।

Friday, 13 July 2018

Appearing मुद्दे पर सच में आज की सुनवाई पर विभिन्न पक्षों की राय



साथियों नमस्कार🙏🏻

  जैसा कि अब तक सब कुछ पता चल गया होगा कि हाई कोर्ट इलाहाबाद की डबल बेंच से आये आदेश पे सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश पारित करते हुए संबंधित सभी पार्टियों को नोटिस इशू किया और नेक्स्ट डेट 6 अगस्त लगा दी।

आर्डर के संबंध में कई बार एक्सप्लेनेशन किया जा  चुका है इसलिए मुख्य विन्दु पे आकर चर्चा करते हैं।

भानू प्रकाश मिश्रा की slp की हियरिंग डेट जैसे ही फिक्स हुई वैसे ही मेरे व मेरी टीम के माइंड में कई भ्रांतियाँ उत्पन्न हुईं। जैसे कि मेरा जो पहला स्टैंड था वह सभी को पता होगा कि हम खुद इस मैटर को लीड करना चाहते थे लेकिन एक ह्यूमन एरर की बजह से मुझे न चाहते हुए पीछे हटना पड़ा जिसमे और भी कई रीजन थे। मेरी टीम का इंटेंशन जैसे ही चेंज होता है तब तब भानू भूत उत्पन्न हो जाता है। मेरी टीम ने निर्णय लिया कि चलो लीड न करके ओमकार के साथ कोर्ट में एंट्री करते हैं। लेकिन तब तक भानू मिश्रा की slp की हियरिंग डेट क्लियर हो जाती है। उसके बाद मैंने एहतियात बरतते हुए और बीएड12 वालों की एक- एक स्टेप को वॉच करते हए आगे बढ़ना शुरू किया। मेरी टीम भी नही चाहती थी कि कोई इस महत्वपूर्ण मैटर को सिंगल लेकर कोर्ट में एंट्री करे। बेशक मैंने शालिनी यादव के नाम से अलग से slp फ़ाइल की है लेकिन मेरा उद्देश्य यही था कि मिलकर किसी तरह पहले आर्डर पे स्टे लिया जाए। उसके बाद कॉर्डिनेशन बनाकर काम किया जाए। लेकिन जो लोग कॉर्डिनेशन की बात कर रहे थे वह केवल दिखावा कर रहे थे।
हाई कोर्ट से आर्डर आये हुए आज लगभग 40 दिन हो गए लेकिन सामने वाले ने केवल झूठ के सिवा कुछ न बोला फिर भी मैं जॉब बचाने के चक्कर मे यह सब इग्नोर करता रहा।

जैसे ही पता चलता है कि भानू की slp की हियरिंग डेट लग गयी वैसे ही मेरी टीम ने अपना गियर चेंज किया। क्योंकि हम सभी लोग ओमकार को आगे लेकर चलना चाहते थे लेकिन खुद ओमकार ने सभी को धोखा दे दिया और एक अन्य slp जो भानू मिश्रा के नाम से फ़ाइल की उसे आगे कर दिया। जबकि भानू हाई कोर्ट में पार्टी भी नही था और बीएड12 बैच। हाँ इतना जरूर था कि मेरी टीम पहले ही डिसाइड कर चुकी थी कि बीएड12 को अकेले कोर्ट में नही जाने देंगे उसके लिए मुझे जो बन सकेगा वह करूँगा।भानू की slp पे हियरिंग डेट लगने के बाद पूरे up में तूफान सा आ गया लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी लोग घरसे नही निकले। जिन साथियों ने अलग अलग slp फ़ाइल कर रखीं थीं वह भी घर से ही ज्ञान उड़ेल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट जाना किसी ने जरूरी नही समझा।

जब आप लोगों ने सभी को बचाने का प्रण किया तो फिर घरसे क्यों नही निकले। चलो ठीक है मानता हूँ कि आपका मैटर नही लगा या आपके adv ने टैग कराना उचित नही समझा लेकिन आपकी जिम्मेदारी बनती थी कि कमसे कम इस महत्वपूर्ण मैटर में कोर्ट में उपस्थिति रहना जरूरी है और हर स्थिति को वाच करते लेकिन नही आये जो बिल्कुल गलत और गैरजिम्मेदाराना है।
वैसे मैं किसी की बुराई नही करता लेकिन लोगों को खुद समझना चाहिए कि यह जॉब कितने कठिन संघर्ष के बाद मिली है जो आपके जीवन मे एक हिस्टोरिकल मोमेंट के रूप में याद रहेगी।

अब फिर भानू की बात करता हूँ।
डेट लगने के बाद मैंने भानू से बात की और उससे कहा कि आप एक एप्लीकेशन देकर डेट आगे बढ़वा सकते हो और ओमकार को आगे बढ़कर खुद लीड करने दो मैं तो भानू को यह उपदेश दे रहा था कि ओमकार को लीड करने दो लेकिन खुद ओमकार नही चाहता था कि मैं लीड करूँ।
जब मैंने ओमकार से बात की तो 11 जुलाई को सुबह कोर्ट में मिलने को कहा और भानू ने भी 11 जुलाई को सुबह ही मिलने को कहा लेकिन जब हम 11 जुलाई को कोर्ट में गया तो भानू को कॉल किया तो उसका दूसरा साथी कह रहा कि भानू अभी स्नान कर रहे हैं। फिर मैंने ओमकार से बात की तो कह रहे कि मैं 10am से पहले कोर्ट नही आयेंगे। उसके बाद मैंने फिरसे कांटेक्ट किया तो भानू ने कहा कि हम लोग 1pm पे कोर्ट आएंगे क्योंकि sir ने 1pm का समय दिया है मिलने का। उसके बाद मैंने लगातार कॉल किया किन्तु भानू और ओमकार ने कॉल अटेन्ड करना जरूरी नही समझा।
मैंने बहुत कोशिश की कि भानू से संपर्क किया जाए और date एक्सटेंड कराने पे विचार हो सके।

जब भानू से संपर्क नहीं हो पाया तो फिर मैं rk singh के पास गया और उनसे date एक्सटेंड कराने पे चर्चा की तो उन्होंने कहा कि ओमकार मेरा कॉल ही अटेन्ड नही कर रहा और मैं खुद परेशान हूँ कि किसी तरह डेट आगे बढ़ जाये फिर rk सिंह sir ने ओमनारायण तिवारी को कॉल किया और ओमकार व भानू को लेटर जारी करने को कहा जिससे डेट आगे बढ़ जाये लेकिन नतीजा कुछ नही निकला। कुछ देर बाद भानू की कॉल आती है तो मैंने उससे कहा कि rk सिंह के चैम्बर में आ जाओ तुम्हे बुला रहे हैं और ओमकार को भी साथ मे लेकर आओ लेकिन न भानू आया और न ओमकार।

उसके बाद rk सिंह sir ने कहा कि इन्हें मैसेज कर दो कि आज 3pm तक लेटर दे दें जिससे डेट आगे बड़े मैंने मैसेज सेंड किया लेकिन रीड करने के बाद भी कोई रिप्लाई नही।

उसके बाद मैं rk सिंह के यहाँ से चला आया ।
मेरे sir प्रशांत शुक्ला जी भी कह रहे थे कि अरुण मिश्रा की बेंच सही नही है और मोस्टली मैटर डिस्पोज़ कर देते हैं। किसी तरह प्रयास करके डेट आगे बढ़ाओ।लेकिन हम लोग सफल नही हुए। लेकिन हम इनकी हर एक्टिविटीज पे नजर रखे हुए थे कि पीछा नही छोड़ूंगा लेकिन कल जैसे ही पता चलता है कि आज भी इन्होंने कोर्ट में मेंशन नही किया तो मैंने भी मैटर टैग कराना शुरू कर दिया। जैसे ही मेरे sir और हम लोग रजिस्ट्री में पहुँचे तो उसने टैग करने से मना कर दिया बहुत कहने के बाद भी उसने एक न सुनी।
फिर हम लोग बापिस चैम्बर में आ गए उसके बाद विकास sir की एंट्री होती है और उन्होंने अपने एक जूनियर को sir के साथ मे भेजा कि जाओ और अभी मैटर टैग कराओ। 5 मिनट भी न लगा कि मैटर टैग हो गया और मंगल सिंह को भी टैगिंग में पीछे छोड़ दिया जिनकी डेट मेरे से एक दिन पहले ही जनरेट हो गयी थी।
यह तो रहा विकास जी का पहला ट्रेलर।

उसके बाद हम लोगों में ब्रीफिंग कार्य आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। और 9pm तक दोनों ही सीनियर की ब्रीफिंग भी हो गयी जो मेरे लिए संतोष जनक रहा।

आज जैसे ही कोर्ट बैठी वैसे ही कोर्ट नंबर 8 में गहमागहमी शुरू हो गयी शुरुआत में लगभग सभी के सीनियर कोर्ट में मौजूद रहे लेकिन ps पटवालिया के कुछ मैटर आइटम नंबर 34 से पहले थे जिसमें लम्बी बहस हुई इसी बीच विकास sir का कोई मैटर दूसरे कोर्ट में आ गया तो वह वहाँ चले गए। जैसे ही आइटम नम्बर 34 take up हुआ वैसे ही राजीव sir जो कि विकास sir के जूनियर हैं उन्होंने आगे बढ़कर मैटर को pass over करा दिया जिससे बीएड12 व btc के वकील नाराज हुए लेकिन राजीव sir ने sorry कहते हुए कहा कि जब तक मेरे सीनियर नही आ जाते तब तक बहस नही हो सकती। उसके बाद सभी लोग कोर्ट से बाहर सामबे गेट पे खड़े हो गए और अपनी अपनी ढपली और अपना अपना राग अलापने लगे। ps पटवालिया जी कह रहे कि मुझे होल्ड करा दिया बहस हो जाती तो ठीक है लेकिन यह उनका अपना मानना था न कि विकास sir का।

उसके बाद लास्ट में आइटम नंबर 34 को सुना गया जो लोग कोर्ट में थे वह सब समझ गए होंगे कि विकास sir के आगे वेंकट रमणी जी कहाँ स्टैंड कर रहे थे। लेकिन btc टीम द्वारा अच्छा प्रयास किया गया और उन्होंने ps पटवालिया जो को इंगेज करके अच्छा मैसेज दिया। क्योंकि कोर्ट में विकास जी व पटवालिया जी को ही भाव दिया जा रहा था। वेंकट रमणी अच्छे वकील हो सकते हैं लेकिन कोर्ट में उनका इफ़ेक्ट सही नही रहता।

फिलाल जैसे ही मैटर सुनना शुरू हुआ वैसे ही जज साहब ने हाई कोर्ट के आर्डर पे कॉमेंट करना शुरू कर दिया। उन्होंने खुद ही कहा कि pursuing is pursuing इसमे pass out होने जैसी कोई कंडीशन ही नही है। खुद जज साहब ने दिलीप गुप्ता जी के इंटरप्रिटेशन पे सवाल उठाए। उसके बाद विकास जी ने खुद एक बार नही कई बार नोट कराया कि यह सभी कैंडिडेट एफक्टेड हैं और परमिशन टू फ़ाइल slp को एक्सेप्ट किया जाए। उसके बाद विकास sir ने योगेंद्र कुमार spl 514/18 में जितने लोगों को रेस्पोंडेंट में मेरी टीम ने पार्टी बनाया था उन सभी को एक एक को नोट कराकर नोटिस इशू कराया।
जिसमे ncte को जारी किया गया नोटिस सबसे महत्वपूर्ण है।

लेकिन आज बीएड12 वालों की असली मानसिकता का भी पता चल गया कि यह अलग क्यों भाग रहे थे। यह लोग नही चाहते थे कि बीएड11 वाले भी हमारे साथ रहें लेकिन मैंने भी कसम खा रखी थी कि पीछा चाँद के पार तक करूँगा जिसमे मैं हर स्टेप पे सफल रहा।

उसका नजारा भी इन्हें कोर्ट में देखने को मिल भी गया। जब तक हम नही गए तब तक इन्हें होल्ड रखा गया।

अब जिन लोगों ने slp फ़ाइल की हों वह सभी धीरे -धीरे अपने मैटर को टैग करा लें।

और 6 अगस्त के लिए तैयार रहें  नही तो जो पैसा लोगों से लिया है वह उनका with respect बापिस कर दें।

मैं तो बीएड12 वालों की बेबकूफ़ी से बेहद परेशान रहा कि जब मैटर इतना सीरियस था और परमिशन टू फ़ाइल जा रहे हो तो कोई डंग का वकील तो कर लेते।

फिलाल अब बहुत हो गया कहाँ तक बताया जाए।

धन्यबाद

लीगल टीम

अजब यादव
राजीव कुमार
शालिनी यादव
हरिमोहन त्रिवेदी
पंकज सिंह

शुभरात्रि🙏🏻
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⛔ *टीम संघ #सुप्रीम कोर्ट अपडेट दिनांक 13 जुलाई 2018#*

  (टेट-11 बीएड-12 प्रकरण)

*ओम नारायण तिवारी,*✍🏼✍🏼....।

💢 _माननीय उच्च न्यायालय allahabad के 30 मई 2018 के आदेश के विरुद्ध माननीय उच्चतम न्यायालय में योजित  भानु प्रकाश मिश्र व् अन्य की अपीलों में कोर्ट संख्या 8 में न्यायमूर्ति अरुण मिश्र जी और न्यायमूर्ति अब्दुल नज़ीर जी की खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर स्थगन देते हुए विपक्षी पार्टियों को नोटिस जारी किया है।_

💢 _सुप्रीम कोर्ट में भानु प्रकाश मिश्र सहित सभी सहयोगी वादियों और प्रदेश में उच्च न्यायालय के आदेश से प्रभावित सभी शिक्षक साथियों को इस सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।_

               *इस प्रकरण में आगे आने वाली अन्य सभी SLP जो निश्चित ही अंतिम सुनवायी हेतु एक साथ आएँगी जिसमे टीम संघ की 10 11 अपयरिंग पर विशाल कुमार लाम्बा डायरी न0 25112 साथ ही11-12 पर ओमकार सिह के नाम से व प्राची सिह डायरी न0-25202 के नाम से, बीसीटी की विक्रम आवेश सिह के नाम से उसमे सभी साथी,  टीम संघ सहित  एकजुट होकर विरोधियों पर वार करेंगे और अंतिम फैसला भी अपने पक्ष में लाएंगे।*
पुनः सभी को सहर्ष सादर शुभकामनायें💐💐

आप सभी से इसी वादे के साथ कि...
*★आजीविका और मान सम्मान से कोई समझौता नहीं*

⚜ *उच्च प्राथमिक शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश*⚜

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सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर --सभी प्रकार की अनिश्चितताओं को दरकिनार करते हुए हमारी टीम द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में बीएड टेट अपेयरिंग मैटर पे slp फाइल कर आप सभी की जॉब हेतु जो ठोस कदम उठाया उसका परिणाम आज सभी के सामने है।
हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विकास सिंह जी व श्री प्रशांत शुक्ला जी द्वारा अपने पक्ष को कोर्ट के सम्मुख रखा जिससे जहां हाईकोर्ट के आदेश पे स्टे ही नहीं वरन सभी पार्टियों को नोटिश इसु हुआ ।
साथियों ये एक बड़ी जीत है ,आप का विस्वाश ही था जो विपरीत माहौल में भी बड़े कदम उठाने का हौसला दिया और खुशी है कि हम उसमे सफल हुए।

साथियों एक और अहम बात slp फाइल होने के दरमयान जिसप्रकार माननीय सुप्रीम कोर्ट के ही एक अधिवक्ता की टिप्पड़ी फ्लैश कर हमारे खिलाफ माहौल बनाया जा रहा था या यूं कहें हमे सन्देह के दायरे में लाकर खड़ा किया जा रहा था आज उन्हीं कथाकथित अधिवक्ता महोदय व उनके चाटुकारों के मुंह मे एक शब्द नहीं है ।
अंत मे मात्र यही जीत हौसलों और जज्बे की होती है जो आप के सामने है ,

आप सभी साथियों के सहयोग व विस्वाश बनाये रखने हेतु बहुत बहुत आभार ।
बीएड 10-11 परिवार

शालिनी यादव
अजब सिंह यादव
हरिमोहन त्रिवेदी

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Monday, 11 June 2018

टीईटी को अवैध कराने को लेकर फ़ाइल याचिका का सत्य :


*टीईटी को अवैध कराने को लेकर फ़ाइल याचिका का सत्य :*
C/P
सर्वप्रथम यह स्पष्ट कर दूँ कि कोर्ट ने किसी की भी टीईटी अवैध घोषित नहीं की है। अतः चैन की साँस लीजिए तथा अब आगे का भाग पढ़िए :

याची ने मांग की थी जिन लोगों ने शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स का अंतिम रिजल्ट आने से पूर्व टीईटी परीक्षा पास की है, उन सभी की टीईटी अवैध घोषित की जाए। और इसके लिए याची ने #सीटीईटी_सितम्बर_2014 के नोटिफिकेशन को आधार बनाया है।

सीटीईटी सितम्बर 2014 का नोटिफिकेशन, अर्हता को लेकर पैरा 7 में कहता है :

✒ The following persons are eligible for appearing in the CTET. (निम्न लोग सीटीईटी देने हेतु पात्र हैं)

✒ Graduation and passed or appearing in final year of two year Diploma in Elementary Education. (स्नातक तथा द्विवर्षीय बीटीसी पास अथवा उसके अंतिम वर्ष में)

इसके अतिरिक्त उक्त नोटिफिकेशन का पैरा 7.3 (v) कहता है :

✒ Candidates who are appearing in the final year of Bachelor Degree in Education or Diploma in Elementary Education etc. are provisionally admitted and their CTET Certificate shall be valid only on passing the aforesaid Examinations. (ऐसे अभ्यर्थी जो शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स के अंतिम वर्ष में प्रशिक्षणरत हैं उनको सीटीईटी में औपबंधिक रूप से शामिल किया गया है तथा उनका सीटीईटी प्रमाणपत्र उक्त शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा पास करने के बाद मान्य होगा)

उक्त याचिका में सीटीईटी 2014 के नोटिफिकेशन को आधार बनाया गया है जबकि :

1) यह नोटिफिकेशन सीटीईटी 2014 की बात करता है, किसी अन्य वर्ष के सीटीईटी अथवा यूपीटीईटी की नहीं। सीटीईटी प्रति वर्ष अलग नोटिफिकेशन निकालती है जो केवल उस ही वर्ष की सीटीईटी के लिए मान्य होता है।

2) नोटिफिकेशन के पैरा 7.3 (v) में स्पष्ट लिखा है कि अंतिम वर्ष में प्रशिक्षणरत लोगों का प्रमाणपत्र बीटीसी उत्तीर्ण करने पर मान्य होगा। यहाँ यह नहीं लिखा है कि यदि सीटीईटी का रिजल्ट प्रशिक्षण कोर्स के अंतिम रिजल्ट आने के बाद आता तब ही मान्य होगा। बल्कि यह लिखा है कि प्रशिक्षण कोर्स (बीटीसी) पास करने के उपरान्त ही सीटीईटी प्रमाणपत्र मान्य होगा।

3) कुछ शातिर लोगों द्वारा पैरा 7.3 (v) की गलत व्याख्या के कारण सीटीईटी ने इस शर्त को अगले वर्ष के नोटिफिकेशन में से हटा दिया है, सीटीईटी 2016 के नोटिफिकेशन में यह शर्त भी हटा ली गई है। इस वर्ष का नोटिफिकेशन सीटीईटी की वेबसाइट पर होगा, इच्छुक लोग जाकर उसको पढ़ सकते हैं।

इस नोटिफिकेशन के पैरा 7.3(v) जैसी ही शर्त टीईटी के नोटिफिकेशन में भी थी परन्तु उसका भी यह ही अर्थ है कि टीईटी प्रमाणपत्र शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स उत्तीर्ण करने के बाद ही मान्य होगा जिस कारण से जिला शिक्षा एव प्रशिक्षण संस्थान (डायट) से भी टीईटी उत्तीर्ण समस्त लोगों को बीटीसी पास करने के बाद ही टीईटी का प्रमाणपत्र बांटा जाता है।

इसके अतिरिक्त एनसीटीई की टीईटी को लेकर 11/02/2011 को जारी की गई गाइडलाइन के पैरा 5(ii) में स्पष्ट लिखा है कि वह सभी लोग टीईटी में भाग लेने हेतु अर्ह होंगे जो एनसीटीई द्वारा मान्य शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स में प्रशिक्षणरत हैं। उक्त गाइडलाइन में किसी भी वर्ष अथवा सेमेस्टर का उल्लेख नहीं है। उक्त गाइडलाइन में कही भी सीटीईटी के नोटिफिकेशन के पैरा 7.3 (v) जैसी कोई भी शर्त नहीं है। शायद इसी कारण से सीटीईटी ने भी इस शर्त को इस वर्ष से हटा लिया है।

यह भी स्पष्ट है कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार एनसीटीई की 11/02/2011 की गाइडलाइन से हटकर टीईटी का आयोजन कर सकते हैं। अतः इस शर्त का तो वैसे भी कोई औचित्य नहीं है। जब कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं लिखा है कि बीटीसी पास करने से पूर्व टीईटी नहीं दिया जा सकता अथवा ऐसा टीईटी मान्य नहीं होगा तब बाद में उसको अवैध घोषित करने का न तो कोई तर्क है न ही कोई कानूनी कारण। टीईटी का उद्देश्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षु की योग्यता का मापन करना होता है, यह केवल एक पात्रता परीक्षा है अतः इसके सन्दर्भ में ऐसी कोई भी शर्त न केवल आधारहीन है अपितु अनावश्यक भी है। जितने अधिक लोग टीईटी पास होंगे उतने ही अधिक लोग अध्यापक बनने की दौड़ में शामिल होंगे व योग्य में सर्वाधिक योग्य लोगों का चुनाव होगा, इससे अनुच्छेद 21 A तथा अनुच्छेद 16(1) दोनों के ही उद्देश्यों की पूर्ति होगी।

जज साहब ने उक्त याचिका में कोई भी बहस न करते हुए अंतिम पैरा में स्पष्ट लिखा है कि :

Court has not adjudicated the claim of petitioners on merit (अर्थात कोर्ट ने याची की मांग के कानूनी पहलू पर कोई निर्णय नहीं दिया है।)

कोर्ट ने पीएनपी सचिव श्री नीना श्रीवास्तव जी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 3 माह के भीतर उक्त गाइडलाइन के अनुसार निर्णय लेने को कहा है। अर्थात कोर्ट ने स्वयं कोई भी निर्णय न लेते हुए नीना मैडम को निर्णय लेने

(सोशल मीडिया से साभार)