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Friday, 20 July 2018

शिक्षामित्रों को विकल्प के आधार पर उनके मूल विद्यालय में वापस तैनात किए जाने सम्बन्धी आदेश जारी

शिक्षामित्रों को विकल्प के आधार पर उनके मूल विद्यालय में वापस तैनात किए जाने सम्बन्धी आदेश जारी


शिक्षामित्रों को विकल्प के आधार पर उनके मूल विद्यालय में वापस तैनात किए जाने सम्बन्धी आदेश जारी, मुख्य सचिव उ0प्र0 शासन का आदेश देखें

🔵 मूल विद्यालय में वापसी हेतु मांगा जाएगा विकल्प
🔵 वर्तमान तैनाती स्थल पर बने रहने का भी होगा विकल्प
🔵 विवाहित शिक्षामित्रों को पति के घर या ससुराल में किया जा सकेगा तैनात
🔵 5 अगस्त तक पूरी होगी कार्यवाही

Saturday, 16 September 2017

शिक्षामित्रों की जगह सरकार लेगी रिटायर्ड शिक्षकों की सेवाएं

शिक्षामित्रों की जगह सरकार लेगी रिटायर्ड शिक्षकों की सेवाएं

लखनऊ (जेएनएन)। शिक्षामित्र यदि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने नहीं आएंगे तो सरकार उनकी संविदा समाप्त कर उनकी जगह रिटायर्ड शिक्षकों की सेवाएं लेगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय दिया जाएगा। शिक्षामित्रों के अडिय़ल रवैये को देखकर सरकार इस विकल्प को अपनाने पर विचार कर रही है।

शिक्षकों के पद पर समायोजन रद होने के बाद से शिक्षामित्र आंदोलित हैं। वे खुद को फिर से शिक्षक बनाये जाने के लिए कानून में बदलाव की मांग कर रहे हैं। शिक्षामित्रों की मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया था। मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों से स्कूलों में जाकर फिर से बच्चों को पढ़ाने का आह्वान किया था। इसके बाद कुछ शिक्षामित्रों ने तो स्कूलों में जाकर पढ़ाना शुरू कर दिया और कुछ ने नई दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सरकार ने स्कूलों में शिक्षामित्रों की उपस्थिति की जांच करायी तो पता चला कि स्कूलों में शिक्षामित्रों की औसत उपस्थिति 55 फीसद ही है। पश्चिमी उप्र के जिलों में उनकी उपस्थिति कहीं ज्यादा कम है।

अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा राज प्रताप सिंह ने जागरण से बातचीत में कहा कि सरकार के लिए स्कूली बच्चों का हित सर्वोपरि है। सरकार बच्चों को केंद्र में रखकर नीतियां बनाती हैैं। शिक्षक और शिक्षामित्र उस नीति का अंग हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझें। यदि शिक्षामित्र स्कूलों में पढ़ाने नहीं आयेंगे तो सरकार उनकी संविदा समाप्त कर उनकी जगह सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर नियुक्त करेगी।

Wednesday, 6 September 2017

अब शिक्षामित्रों को दस हजार रुपये मानदेय लाभान्वित होंगे 165157 शिक्षामित्र कैबिनेट का फैसला

अब शिक्षामित्रों को दस हजार रुपये मानदेय

लाभान्वित होंगे 165157 शिक्षामित्र

कैबिनेट का फैसला

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : योगी सरकार ने प्रदेश के 165157 शिक्षामित्रों को 3500 रुपये से बढ़ाकर दस हजार रुपये मानदेय देने का फैसला किया है। इनमें 1.37 लाख वह शिक्षामित्र भी हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक पद से हटा दिया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने शिक्षामित्रों से हुई कई चक्र की वार्ता में यह भरोसा दिया था।1मंगलवार को लोकभवन में योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि उप्र बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद शिक्षक पद पर समायोजित किए गए 1.37 लाख शिक्षामित्र पहली अगस्त, 2017 से मूल पद पर वापस हो जाएंगे। 1सरकार की शिक्षामित्रों के साथ पूरी सहानुभूति है। शिक्षामित्रों को 11 माह मानदेय मिलेगा। उल्लेखनीय है कि अखिलेश सरकार ने वर्ष 2014 में स्नातक उत्तीर्ण और दूरस्थ शिक्षा विधि से दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण पूरा करने वाले शिक्षामित्रों को अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देते हुए प्राथमिक शिक्षकों के पदों पर समायोजित करने का फैसला किया था। शिक्षामित्रों को शिक्षकों के पद पर समायोजित के लिए 19 जून, 2014 को शासनादेश जारी किया गया था। प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन हो चुका था जब हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले को गलत ठहराते हुए समायोजन को रद कर दिया था।1 बीती 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए उनके समायोजन को रद करने का निर्णय सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब राज्य सरकार समायोजित किये गए शिक्षामित्रों को उनके मूल पद पर वापस करने के लिए नियमावली में संशोधन किया गया है। इस मौके पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अनुपमा जायसवाल भी मौजूद थी। 

Thursday, 10 August 2017

समायोजित शिक्षा मित्रों के मानदेय पर निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे अपने मूल पदों पर काम करेंगे शिक्षामित्र ढाई अंक प्रतिवर्ष मिलेगा वेटेज टीईटी नवम्बर के पहले हफ्ते में

समायोजित शिक्षा मित्रों के मानदेय पर निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे

अपने मूल पदों पर काम करेंगे शिक्षामित्र

ढाई अंक प्रतिवर्ष मिलेगा वेटेज

टीईटी नवम्बर के पहले हफ्ते में

प्रमुख संवाददाता- राज्य मुख्यालय राज्य सरकार ने समायोजित शिक्षामित्रों के मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने से मना कर दिया है। वहीं शिक्षामित्र टीईटी पास करने तक अपने मूल पद यानी शिक्षामित्र के तौर पर काम करेंगे। नियुक्ति में प्रति वर्ष ढाई अंक और अधिकतम 25 अंक वेटेज देने पर भी सहमति बन गई है लेकिन मानदेय पर कोई भी फैसला मुख्यमंत्री लेंगे। प्रदेश के 1.37 लाख समायोजित शिक्षामित्रों के संबंध में गुरुवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि नवंबर के पहले हफ्ते में अध्यापक पात्रता परीक्षा करवाई जाएगी। विभागीय अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र टीईटी पास करने तक अपने मूल पद पर काम करेंगे। वे चाहें तो जहां तैनाती है वहां काम करें या अपने मूल स्कूल में वापस जाना चाहे तो वहां के लिए आवेदन कर सकेंगे। जुलाई का वेतन समायोजित शिक्षा मित्रों को जल्द ही दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अनुभव के आधार पर वेटेज देने पर भी सहमति बन गई है। शिक्षा मित्रों को अनुभव वेटेज के तौर पर प्रतिवर्ष सेवा के लिए ढाई अंक दिए जाएंगे और अधिकतम 25 अंक दिए जा सकेंगे। ये शिक्षा मित्रों के शैक्षिक गुणांक में जोड़ दिए जाएंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षामित्र चाहें तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर कर सकते हैं लेकिन सरकार अब सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी। मानदेय की धनराशि को लेकर मुख्यमंत्री निर्णय लेंगे। सरकार अभी तक असमायोजित शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय दे रही है। इसके अलावा राज्य सरकार राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को पत्र लिख कर मानकों में छूट देने का अनुरोध करेगी। दरअसल एनसीटीई के मानकों के मुताबिक वही अभ्यर्थी टीईटी दे सकता है जो स्नातक स्तर पर कम से कम 50 फीसदी नंबर रखता हो। शिक्षामित्रों में कई ऐसे भी हैं जो इनसे कम अंक रखते हैं। लिहाजा मानकों में छूट के लिए एनसीटीई की अनुमति चाहिए होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई को शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया है लेकिन निर्णय में यह भी कहा है कि यदि सरकार चाहे तो इनके टीईटी पास करने के बाद इन्हें लगातार दो भर्तियों में मौका दे सकती है। अनुभव और उम्र के आधार पर भी वरीयता दे सकती है। बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह व अन्य अधिकारियों समेत शिक्षामित्र संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। 

Thursday, 27 July 2017

Shiksha Mitra के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, UP सरकार किसी को नहीं हटाएगी

Shiksha Mitra के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, UP सरकार किसी को नहीं हटाएगी

Shiksha Mitra के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, UP सरकार किसी को नहीं हटाएगी
Patrika 27 Jul 2017 10:57

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा शिक्षा मित्रों (Shiksha Mitron) का समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद पूरे प्रदेश के शिक्षा मित्र उग्र हो गए हैं। बुधवार को शिक्षा मित्रों ने प्रदेश भर में सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। वहीं इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राजप्रताप सिंह का जो बयान आया है वह शिक्षा मित्रों को थोड़ी राहत देने वाला है। राजप्रताप सिंह ने कहा है कि यूपी में 1.37 लाख सहायक शिक्षक दोबारा शिक्षा मित्र बन गए हैं। लेकिन सरकार किसी को हटाने नहीं जा रही। उन्होंने कहा कि हम शिक्षा मित्रों को राहत देने के विकल्प तलाश रहे हैं।

शिक्षा मित्रों के साथ हमारी सहानुभूति

राजप्रताप सिंह ने कहा कि हमने शिक्षा मित्रों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन किया है। अब हमारी सबसे पहली जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पालन करना है। यूपी के 1.37 लाख शिक्षा मित्रों को होने वाले आर्थिक नुकसान पर राज प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश के हर शिक्षा मित्र के साथ हमारी सहानुभूति है। हम शिक्षा मित्रों के हितों की रक्षा के लिए हर मुमकिन विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: सरकार किसी शिक्षा मित्र को नहीं हटाएगी
आपको बता दें कि सरकार ने कहा था कि यूपी में 65 हजार सरप्लस शिक्षक हैं। लेकिन अब 1.37 लाख शिक्षा मित्रों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में शिक्षकों की कमी हो जाएगी। इस पर राज प्रताप सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 1.37 लाख सहायक शिक्षक दोबारा शिक्षा मित्र बन गए हैं। सरकार किसी को हटाने नहीं जा रही। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियुक्ति में प्राथमिकता टीईटी के दो मौके देने को कहा है। सरकार ये सारे मौके प्रदेश के सभी शिक्षा मित्रों को देगी।


वेतन के बारे में ली जा रही राय

शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद उन्हें जुलाई से मिलने वाले वेतन पर राजप्रताप सिंह ने कहा कि इस पर कानूनी राय ली जा रही है। अभी हमारी प्राथमिकता शिक्षा मित्रों की समस्या का समाधान करना है। हर संभव विकल्प पर विधिक राय लेकर जो भी प्रस्ताव होगा उसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। हम किसी भी शिक्षा मित्र का अहित नहीं होने देंगे। ये हो सकते हैं विकल्प
शिक्षा मित्रों को राहत देने के लिए अब जो विकल्प हैं उसके मुताबिक प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकती है। वहीं 1.37 लाख शिक्षा मित्रों में से 30 हजार शिक्षा मित्र टीईटी पास हैं। प्रदेश सरकार उन्हें नई भर्ती निकालकर तुरंत समायोजित कर सकती है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा में भी शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। लेकिन त्रिपुरा सरकार अब उन्हें गैर शैक्षणिक पदों पर समायोजित करने जा रही है। उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न विभागों में करीब दो लाख से अधिक पद रिक्त हैं। सरकार चाहे तो यूपी के शिक्षा मित्रों को भी गैर शैक्षणिक पदों पर समायोजित कर सकती है। सरकार के सामने एक रास्ता ये भी है कि शिक्षा मित्रों को वर्तमान में मिल रहे वेतन पर पदनाम बदलकर स्कूलों में पढ़ाने का मौका दिया जा सकता है। एक रास्ता और है जिसके मुताबिक शिक्षा मित्रों के पढ़ाने के अनुभव को देखते हुए केेन्द्र सरकार टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने का अध्यादेश लेकर आए और उनको सहायक शिक्षक पद पर समायोजित करे। अब केंद्र और राज्य सरकार शिक्षा मित्रों को राहत देने के लिए क्या रास्ता निकालती है, यह देखने वाली बात होगी।

Thursday, 18 May 2017

शिक्षामित्रों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, अंतिम समय पर टेट पास शिक्षा मित्रों को माफ करने की गुहार, समस्त शिक्षा मित्रों को मानवीय आधार दया की याचना, सुप्रीम कोर्ट टेट योग्यता से छूट देने पर सख्त, टेट वेटेज पर शुक्रवार को सुनवाई,


शिक्षामित्रों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, अंतिम समय पर टेट पास शिक्षा मित्रों को माफ करने की गुहार, समस्त शिक्षा मित्रों को मानवीय आधार दया की याचना, सुप्रीम कोर्ट टेट योग्यता से छूट देने पर सख्त,
टेट वेटेज पर शुक्रवार को सुनवाई,

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 18 May 2017 02:01 AM IST
उत्तर प्रदेश के 1.72 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षकों के तौर पर समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिखित रूप से अपना पक्ष रखने वाले पक्षकार एक हफ्ते के भीतर अपना पक्ष रख सकते हैं। अदालती समय सीमा और परंपरा से हटकर सुप्रीम कोर्ट ने शाम चार बजे के बाद इस मामले पर सुनवाई शुरू की जो तकरीबन छह बजे तक चली।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने बुधवार को सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया। शिक्षामित्रों की ओर से सलमान खुर्शीद, अमित सिब्बल, नितेश गुप्ता, जयंत भूषण, आरएस सूरी सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने अपनी ओर से दलीलें पेश की।

शिक्षामित्रों के वकीलों ने ये दी दलील

शिक्षामित्रों की ओर से पेश अधिकतर वकीलों का कहना था कि शिक्षामित्र वर्षों से काम कर रहे हैं। वे अधर में हैं। लिहाजा मानवीय आधार पर सहायक शिक्षक के तौर पर शिक्षामित्रों का समायोजन जारी रखा जाए।
साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करे। वरिष्ठ वकील नितेश गुप्ता ने कहा कि सहायक शिक्षक बने करीब 22 हजार शिक्षामित्र ऐसे हैं जिनकेपास अनिवार्य योग्यता है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि ये शिक्षामित्र स्नातक बीटीसी और टीईटी पास हैं। ये सभी करीब 10 वर्षों से काम कर रहे हैं। वहीं एक अन्य वकील ने कहा कि यह कहना गलत है कि शिक्षामित्रों को नियमित किया गया है। उन्होंने कहा कि सहायक शिक्षकों केरूप में उनकी नियुक्ति हुई है।

मानवीय आधार पर दिया जाए फायदा

वकीलों का कहना था कि राज्य में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए स्कीम के तहत शिक्षामित्रों की नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति पिछले दरवाजे से नहीं हुई थी। शिक्षामित्र पढ़ाना जानते हैं। उनके पास अनुभव है। वे वर्षों से पढ़ा रहे है।
उम्र के इस पड़ाव में उनके साथ मानवीय रवैया अपनाया जाना चाहिए। सभी की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
मालूम हो कि 12 सिंतबर 2015 को हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 1.72 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन को निरस्त कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट अब शुक्रवार को इस मसले पर सुनवाई करेगा। अदालत देखेगी कि इन सभी को टीईटी का कितना वैटेज मिलना चाहिए।

शिक्षामित्रों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, अंतिम समय पर टेट पास शिक्षा मित्रों को माफ करने की गुहार, समस्त शिक्षा मित्रों को मानवीय आधार दया की याचना, सुप्रीम कोर्ट टेट योग्यता से छूट देने पर सख्त, टेट वेटेज पर शुक्रवार को सुनवाई,


शिक्षामित्रों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, अंतिम समय पर टेट पास शिक्षा मित्रों को माफ करने की गुहार, समस्त शिक्षा मित्रों को मानवीय आधार दया की याचना, सुप्रीम कोर्ट टेट योग्यता से छूट देने पर सख्त,
टेट वेटेज पर शुक्रवार को सुनवाई,

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 18 May 2017 02:01 AM IST
उत्तर प्रदेश के 1.72 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षकों के तौर पर समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिखित रूप से अपना पक्ष रखने वाले पक्षकार एक हफ्ते के भीतर अपना पक्ष रख सकते हैं। अदालती समय सीमा और परंपरा से हटकर सुप्रीम कोर्ट ने शाम चार बजे के बाद इस मामले पर सुनवाई शुरू की जो तकरीबन छह बजे तक चली।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने बुधवार को सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया। शिक्षामित्रों की ओर से सलमान खुर्शीद, अमित सिब्बल, नितेश गुप्ता, जयंत भूषण, आरएस सूरी सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने अपनी ओर से दलीलें पेश की।

शिक्षामित्रों के वकीलों ने ये दी दलील

शिक्षामित्रों की ओर से पेश अधिकतर वकीलों का कहना था कि शिक्षामित्र वर्षों से काम कर रहे हैं। वे अधर में हैं। लिहाजा मानवीय आधार पर सहायक शिक्षक के तौर पर शिक्षामित्रों का समायोजन जारी रखा जाए।
साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करे। वरिष्ठ वकील नितेश गुप्ता ने कहा कि सहायक शिक्षक बने करीब 22 हजार शिक्षामित्र ऐसे हैं जिनकेपास अनिवार्य योग्यता है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि ये शिक्षामित्र स्नातक बीटीसी और टीईटी पास हैं। ये सभी करीब 10 वर्षों से काम कर रहे हैं। वहीं एक अन्य वकील ने कहा कि यह कहना गलत है कि शिक्षामित्रों को नियमित किया गया है। उन्होंने कहा कि सहायक शिक्षकों केरूप में उनकी नियुक्ति हुई है।

मानवीय आधार पर दिया जाए फायदा

वकीलों का कहना था कि राज्य में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए स्कीम के तहत शिक्षामित्रों की नियुक्ति हुई थी। उनकी नियुक्ति पिछले दरवाजे से नहीं हुई थी। शिक्षामित्र पढ़ाना जानते हैं। उनके पास अनुभव है। वे वर्षों से पढ़ा रहे है।
उम्र के इस पड़ाव में उनके साथ मानवीय रवैया अपनाया जाना चाहिए। सभी की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
मालूम हो कि 12 सिंतबर 2015 को हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 1.72 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन को निरस्त कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट अब शुक्रवार को इस मसले पर सुनवाई करेगा। अदालत देखेगी कि इन सभी को टीईटी का कितना वैटेज मिलना चाहिए।

Wednesday, 17 May 2017

खुशखबरी: अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार और शिक्षामित्रों का 10 हजार तय

खुशखबरी: अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार और शिक्षामित्रों का 10 हजार तय

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों और शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ा दिया गया है। उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत 30949 अंशकालिक अनुदेशकों को अब 17 हजार और प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत 26504 शिक्षामित्रों को 10 हजार मानदेय मिलेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की कमेटी की बैठक में लिया गया यह निर्णय बुधवार को सार्वजनिक कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन करने पर सुनवाई चल रही है। यदि फैसला शिक्षा मित्रों के खिलाफ आता है तो मानदेय का बढ़ना उनके लिए राहत की खबर हो सकती है। बता दें कि अभी शिक्षा मित्रों को साढ़े तीन हजार रुपये महीने मिलते हैं।

यूपी शिक्षामित्र मामलाः टेट पास शिक्षामित्रों ने जोरदार तरीके से रखा पक्ष, अगली डेट 19 मई

यूपी शिक्षामित्र मामलाः टेट पास शिक्षामित्रों ने जोरदार तरीके से रखा पक्ष, अगली डेट 19 मई

उत्तर प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस यूयू ललित की पीठ में सुनवाई पूरे दो घंटे चली। सुनवाई करीब 4.15 पर शुरू हुई और करीब 6.15 पर खत्म हुई। कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले पर और पक्षों को भी सुना जाना बाकी है। अतः सुनवाई 19 मई को दोपहर दो बजे से होगी।

टैट पास शिक्षामित्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि यूपीटेट पास शिक्षामित्रों को छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि ये लोग पूरी तरह लयोग्य हैं और इन्होंने टेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। 72826 भर्ती में भी इनका सिलेक्शन हो गया था लेकिन सरकार ने पहले से ही इनका समायोजन कर लिया था इसलिए इनको सहायक अध्यापक के पद से नहीं हटाया जाए। इस पर जज साहब ने कहा कि आप टैट है। हम इसको नोट कर लेते हैं।
  
आज जज साहब शिक्षामित्रों के वकीलों से सहमत नहीं हैं और टेट से छूट देने के पक्ष में नहीं हैं।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश को स्टे कर दिया था।

पिछली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता शांतिभूषण और राम जेठमलानी ने शिक्षामित्रों की ओर से बहस की। उन्होंने कहा कि सरकार को 18 वर्ष से काम कर रहे शिक्षामित्रों को एक पूल की तरह से देखने का अधिकार है। यह पूल एक भर्ती स्रोत है जिसे सहायक शिक्षकों को भर्ती करने के लिए इस्तेमाल करने में कोई कानूनी दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह से योग्य और शैक्षणिक योग्यता में पूर्ण है। हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहराकर कर गलत किया है।

गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट ने पिछले मंगलवार को शिक्षामित्रों की नियुक्ति पर सवाल उठाया था और टिप्पणी की थी कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति संविधानिक सिद्धांतों के अनुसार नहीं की गई है।

Wednesday, 26 April 2017

Case Update 6

सुनवाई अब कल होगी

25 no. केस 4 बजै तक चलेगा

Case Update 5

सुनवाई के क्रम निर्धारित             

   1- टेट बनाम अकेमदिक           

    2-सभी कंटेप्ट                           

3-उसके बाद शिक्षामित्र मेटर        

  Note-: सभी लालुपञ्जु वकील व् क्लर्क की एंट्री बंद रहेगी आज        

Case Update 4

उत्तर-प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक भर्ती की माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कोर्ट न०11 में आइटम न०33 पर लगे मामले की सुनवाई आज लगभग 15 मिनट तक हुई। आज ही लंच बाद मामले की सुनवाई जारी रहेगी....प्रबल सम्भावना कि आज से कल तक में कुछ ठोस निर्णय आ जाए।

Case Update 2

सबसे पहले 4347(12&15&16th अमेंडमेंट) फिर कंटेम्प्ट फिर शिक्षामित्र मामला सुना जायेगा
कोर्ट में क्लाइंट और एडवोकेट के क्लर्क की एंट्री भी बन्द और सिर्फ एडवोकेट वह भी गाउन वाले allow
वृजेन्द्र कश्यप

Case update 3

सुनवाई समाप्त । विस्तृत जानकारी थोड़ी देर में

केस पास ओवर लंच के बाद या पहले ही सुनवाई दोबारा भीड़ की बजह से हुआ पास ओवर * NEWS BY वृजेन्द्र कश्यप

SC case Update 1

UPTET 72825 - SHIKSHAMITRA केस की सुनवाई 25 मिनट से लगातार जारी