Welcome to BASIC KA TEACHER.COM

Translate

Showing posts with label 7th Pay Commission. Show all posts
Showing posts with label 7th Pay Commission. Show all posts

Saturday, 2 June 2018

राज्य कर्मचारियों के लिये बड़ी खुशखबरी, एरियर का भुगतान 30 जून से पहले

राज्य कर्मचारियों के एरियर का भुगतान 30 जून से पहले

लखनऊ. राज्य कर्मचारियों के एरिया को लेकर बड़ी है। राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को सातवें वेतनमान के बकाए कि 50 फीसदी का भुगतान 30 जून से पहले किया जाएगा। यह आदेश शासन के द्वारा दिया गया है। एरियर भुगतान के बाद सरकार पर करीब 8900 का खर्च आएगा। इस एरियर का 80 फ़ीसदी कर्मचारियों के जीपीएफ में जाएगा तथा बाकी की धनराशि का 20% नगद भुगतान सरकार करेगी।

19 लाख राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और नगरीय स्थानीय निकायों के कर्मियों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही 11 लाख पेंशनरों को भी इसका लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश सचिवालय पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन एंड पार्टी के अनुसार पेंशनरों का सरकार नगद भुगतान करेगी। उन्होंने बताया कि पेंशनर हर महीने 2 हजार रुपये का लाभ उठाएंगे। राज्य कर्मचारी को 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक पुनरीक्षित वेतन मैट्रिक्स में वेतन तथा महंगाई भत्ता के अवशेष का भुगतान किया जाना है। इससे पहले जारी हुए शासनादेश में यह व्यवस्था थी की बकाया एरियर के 50 फीसदी का भुगतान 2018-19 में तथा शेष राशि का भुगतान 2019-20 में किया जाएगा। 2018-19 के 50 फीसदी के भुगतान का आदेश हुआ है। राज्य कर्मचारियों को 20 फीसदी जो नकद भुगतान होगा वह टैक्स काटने के बाद उनके खाते में दिया जाएगा।
कर्मचारियों के जीपीएफ से भी कटेगा आयकर
बकाया भुगतान में कर्मचारी जिनकी देय आयकर 20 फीसदी से अधिक है। उनके खाते में नगद एक पैसा भी नहीं जाएगा उल्टा उन कर्मचारियों के जीपीएफ से भी टेक्स की धनराशि काटी जाएगी। भविष्य निर्वाह निधि में जमा की जाने वाली 80 फीसदी धनराशि 1 साल तक नहीं निकाली जा सकेगी। जिन कर्मचारियो को जीपीएफ खाता नहीं खुला है को देय अवशेष एनएससी या पीपीएफ में जमा की जाएगी। नई पेंशन योजना से आच्छादित करने को को कार्मिकों को अवशेष धनराशि के 10 फीसदी के बराबर टियर 1 पेंशन खाते में जमा की जाएगी। अवशेष 90 फ़ीसदी धनराशि कर्मिकों को उनके विकल्पों के आधार पर एनएससी या पीपीएफ में जमा करा दी जाएगी। कर्मचारियों को कुल फायदा जीपीएफ में जमा धनराशि का ही होगा। सरकार जो 20 फीसदी नगद देगी। अधिकांश कर्मचारियों को एक पैसा नहीं मिलना है यह 20 फ़ीसदी धनराशी टैक्स में ही कट जाएगी।

Thursday, 8 March 2018

50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दिया ये तोहफा

50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सरकार ने दिया ये तोहफा

मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाया.

नई दिल्लीः मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. कर्मचारियों को बढ़े हुए भत्ते का लाभ 1 जनवरी 2018 से मिलेगा. केंद्र के इस फैसले से 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलेगा. महंगाई भत्ते में बढ़ोत्तरी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर की गई है. केंद्रीय कर्मचारियों को अभी उनकी बेसिक सैलरी पर 5 फीसदी दर से महंगाई भत्ता मिलता था. केंद्रीय केबिनेट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 28 जून 2016 को ही मंजूरी दे दी थी..
सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 14.27 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी थी. केंद्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 7,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए महीने करने को मंजूरी दे दी थी. वहीं फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 फीसदी बढ़ाने को मंजूरी दे दी थी..
केंद्रीय कर्माचरियों की मांग है कि उनकी न्यूनतम तनख्वाह  18,000 रुपए महीने की जगह 26,000 रुपए महीना किया जाए. इसके अलावा फिटमेंट फैक्टर को भी 2.57 गुने से बढ़ाकर 3.68 गुना किया जाए. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक केंद्र सरकार कर्मचारियों की इस मांग पर विचार कर रही है. वेतन विसंगति को सुलाझाने के लिए नेशनल अनॉमली कमेटी बनाई गई थी..
न्यूनतम वेतन मे बढ़ोतरी और फिटमेंट फेक्टर वेतन विसंगति नहीं थे, इसलिए यह नेशनल अनॉमली कमेटी के दायरे में नहीं आए.बुधवार को कैबिनेट की बैठक कई अन्य फैसले भी लिए गए जिसमें सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र के लिए राहत पैकेज को मंजूरी दी, नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम के भुगतान के लिए और समय दिया गया है..

Tuesday, 27 February 2018

7वां वेतन आयोग: सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 21 हजार रुपए होगी न्यूनतम सैलरी!

7वां वेतन आयोग: सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 21 हजार रुपए होगी न्यूनतम सैलरी!

Zee News Hindi 26 Feb. 2018 15:49

लाखों सरकारी कर्मचारी 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद अपने बढ़े हुए वेतन का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच, ये खबर आई है कि सरकार अप्रैल से बढ़ी हुई सैलरी देना शुरू कर सकती है.

मैट्रिक्स स्तर से 1 से 5 के वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाई जा सकती है.

खास बातें

7वें वेतन आयोग के तहत अप्रैल से मिल सकती है बढ़ी हुई सैलरी
न्यूनतम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने का फैसला संभव
18000 रुपए से बढ़ाकर 21 हजार रुपए की जा सकती है न्यूनतम सैलरी
नई दिल्ली: लाखों सरकारी कर्मचारी 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद अपने बढ़े हुए वेतन का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच, ये खबर आई है कि सरकार अप्रैल से बढ़ी हुई सैलरी देना शुरू कर सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने न्यूनतम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने का फैसला किया है. आपको बता दें, अरुण जेटली ने दो साल पहले राज्यसभा में बढ़ा वेतन देने का वादा किया था. इसके अलावा 6 जुलाई, 2017 को केंद्र सरकार ने 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) की सिफारिशें गजट में छापी थीं. सातवें वेतन आयोग के मुताबिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी हर महीने 7 हजार से लेकर 18 रुपए तक बढ़ सकती है.
21000 रुपए हो सकती है न्यूनतम सैलरी
अंग्रेजी अखबार सेन टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, मैट्रिक्स स्तर से 1 से 5 के वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाई जा सकती है. इनकी न्यूनतम सैलरी को तय वेतन 18000 रुपए से बढ़ाकर 21 हजार रुपए किया जा सकता है. वहीं, फिटमेंट फैक्टर को भी 2.57 गुना से बढ़ाकर 3 गुना किया जा सकता है. कर्मचारियों को इसका फायदा एक अप्रैल 2018 से मिल सकता है. हालांकि, केंद्रीय कर्माचरियों की मांग है कि उनकी न्यूनतम सैलरी को 18,000 रुपए महीने बढ़ाने के बजाय 26,000 रुपए महीने की जाए. इसके अलावा फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 गुना से बढ़ाकर 3.68 गुना कर दिया जाए.
निम्न स्तर के कर्मचारियों को होगा फायदा
एक अधिकारी ने अखबार को बताया कि वित्त मंत्री अरुण जेटली मध्य स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि के बजाय निम्न स्तर के कर्मचारियों को चुनना पसंद करेंगे. इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापक मध्य-स्तरीय कर्मचारियों को ज्यादा वृद्धि नहीं दिखाई देगी, क्योंकि, आय के ध्रुवीकरण के लंबे समय से चलने वाले रुझान और केंद्रीय सरकार के विभागों में सिकुड़ते मध्य स्तर को देखते हुए ऐसा लगता है.
वित्त मंत्री लेंगे फैसला
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री 30 अक्टूबर 2017 के डीओपीटी पत्र की अनदेखी कर खुद मामले को देख रहे हैं और अप्रैल से वेतन वृद्धि को लागू करने के लिए संबंधित हितधारकों के साथ मामले की चर्चा कर रहे हैं. 12 फरवरी को वित्त मंत्रालय ने सभी समूहीय अधिकारियों के समूह के साथ-साथ केंद्रीय बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स (सीबीईसी) के तहत सभी निदेशालयों के ग्रुप बी और सी केडर के कर्मचारियों के विलय का निर्देश दिया.
एरियर का नहीं मिलेगा फायदा
सूत्रों की मानें तो सातवें वेतन आयोग के तहत बढ़ी हुई सैलरी और फिटमेंट फैक्टर अगर लागू होता है तो कर्मचारियों को एरियर का फायदा नहीं मिलेगा. पिछले हफ्ते की कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि अप्रैल 2018 से बढ़ी हुई सैलरी मिल सकती है. लेकिन, सरकार एरियर देने के मूड में नहीं है. वहीं, सरकार के वित्तीय सलाहकारों ने वेतन वृद्धि से अतिरिक्त बोझ पड़ने की बात कही थी.
कमेटी का गठन किया गया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है. इसमें सभी विभागों के अधिकारियों और मंत्रियों को शामिल किया गया है. इस समिति में गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के सचिवों के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग, पेंशन, रिवेन्यू, एक्सपेंडेचर, हेल्थ, रेलवे बोर्ड के साइंस एंड टेक्नॉलोजी के चैयरमेन और डिप्टी कैग इसके मेंबर हो सकते हैं. हालांकि, अभी तक इस कमेटी के बारे में भी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

Wednesday, 27 December 2017

7th Pay Commission: क्या हाई लेवल कमेटी सैलरी और फिटमेंट फेक्टर बढ़ाने की सिफारिश करेगी

7th Pay Commission: क्या हाई लेवल कमेटी सैलरी और फिटमेंट फेक्टर बढ़ाने की सिफारिश करेगी

7th Pay Commission, CPC Latest News: केंद्रीय कर्मचारियों ने जब सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे सैलरी और फिटमेंट फेक्टर बढ़ाने की मांग की थी तब वित्त मंत्रालय की तरफ से एक हाई लेवल कमेटी बनाने का वादा किया गया था।

जनसत्ता ऑनलाइनPublished on: December 26, 2017 11:36 am

7th Pay Commission: कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक न्यूनतम वेतन को 7,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए महीने करने को पहले ही मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय कर्मचारी 7th Pay Commission की सिफारिशों से परे भी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए नेशनल अनोमली कमेटी भी बनाई थी। अब सरकार कर्मचारियों की मांगों को देखते हुए एक हाई लेवल कमेटी बना सकती है। पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या हाई लेवल कमेटी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे सैलरी और फिटमेंट फेक्टर बढ़ाने के लिए सिफारिश करेगी, या फिर एक बार केंद्रीय कर्मचारियों को मायूसी हाथ लगेगी।

केंद्रीय कर्मचारियों ने जब सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे सैलरी और फिटमेंट फेक्टर बढ़ाने की मांग की थी तब वित्त मंत्रालय की तरफ से एक हाई लेवल कमेटी बनाने का वादा किया गया था। ऐसा हो सकता है कि कैबिनेट सेक्रेटरी प्रदीप कुमार सिन्हा इस कमेटी के अध्यक्ष हों। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाई लेवल कमेटी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे वेतन बढ़ाने पर अपनी रिपोर्ट 6 महीने में सबमिट करेगी। इस समिति में गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के सचिवों के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग, पेंशन, रिवेन्यू, एक्सपेंडेचर, हेल्थ, रेलवे बोर्ड के साइंस एंड टेक्नॉलोजी के चैयरमेन और डिप्टी कैग इसके मेंबर हो सकते हैं।

गौरतलब है कि कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक न्यूनतम वेतन को 7,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए महीने करने को पहले ही मंजूरी दे दी है। इसके अलावा फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 गुना बढ़ा दिया गया है। इसके बावजूद केंद्रीय कर्मचारियों की मांग है कि न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए महीने से बढ़ाकर 26,000 रुपए महीने किया जाए और फिटमेंट फेक्टर को 2.57 गुना बढ़ाने के बजाए 3.68 गुना बढ़ाया जाए। सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए नेशनल अनोमली कमेटी बनाई थी। केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद थी कि यह कमेटी न्यूनतम सैलरी को 18,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए करने का सुझाव देगी। इसके अलावा फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 से बढ़ाकर 3.00 करने का सुझाव देगी।

Monday, 10 April 2017

सातवां वेतन आयोग : अलाउंस समिति की निर्णायक बैठक संपन्न, अब कैबिनेट में पेश होगी रिपोर्ट

सातवां वेतन आयोग : अलाउंस समिति की निर्णायक बैठक संपन्न, अब कैबिनेट में पेश होगी रिपोर्ट
Times Hindi

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से केंद्रीय कर्मचारियों में रोष है…
खास बातें

ई मुद्दों को लेकर कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जताई.
तीन समितियों में एक समिति अलाउंस को लेकर बनाई गई थी
प्रतिनिधियों के बीच अंतिम दौर की बातचीत भी समाप्त हो गई.
नई दिल्ली: सातवां वेतन आयोग (7TH Pay Commission) कर्मचारियों के जितनी खुशियां लेकर आया उतनी ही दुविधाओं के साथ भी केंद्रीय कर्मचारियों को घेर दिया. इसके लागू होने के बाद से कई मुद्दों को लेकर कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जताई. न्यूनतम वेतन मान से लेकर कई अलाउंस तक के मुद्दों पर कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने समिति बनाकर उसका हल निकालने की कोशिश की. तीन समितियों में एक समिति अलाउंस को लेकर बनाई गई थी. वित्त सचिव अशोक लवासा की अध्यक्षता में बनाई गई इस समिति की अब तक करीब 15 बैठकें हुई और 6 तारीख को इस समिति में कर्मचारियों की ओर से उनके प्रतिनिधि और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच अंतिम दौर की बातचीत भी समाप्त हो गई.
कर्मचारी संगठनों के संयुक्त संघ एनसीजेसीएम के संयोजक शिव गोपाल मिश्र ने एनडीटीवी को बताया कि गुरुवार को अलाउंस समिति की अंतिम दौर की बैठक हुई जिसके बाद इस मुद्दे पर अब आगे और बातचीत नहीं होगी. मिश्र ने एनडीटीवी को बताया कि यह समिति अब दो-चार दिन में अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंप देगी. माना यह भी जा रहा है कि अगले सप्ताह होने वाली कैबिनेट की बैठक में यह रिपोर्ट प्रस्तुत हो सकती है. इस बैठक में निर्णय होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कोई अच्छी खबर आ सकती है.
उल्लेखनयी है कि समितियों की रिपोर्ट चार महीनों में आ जानी चाहिए थी लेकिन देरी के कारण केंद्रीय कर्मचारी नाराज हैं. इस संबंध में कर्मचारियों के नेता शिव गोपाल मिश्र ने कैबिनेट सचिव से मुलाकात भी की थी और सरकार को कर्मचारियों की भावनाओं से अवगत कराया था.
शिव गोपाल मिश्र ने पहले बताया था कि तीन तारीख को भी रेलमंत्री से मुलाकात की गई थी. इस बैठक में भी रेलवे कर्मचारियों की अलाउंस, मिनिमम वेज और फिटमेंट फॉर्मूला, एनपीएस और पेंशन को लेकर भारी रोष के बारे में रेलमंत्री सहित अन्य बड़े अधिकारियों को जानकारी दी गई थी.
बता दें कि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) द्वारा केन्द्रीय कर्मचारियों को दिए जाने वाले कई भत्तों को लेकर असमंजस की स्थिति है. नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में सातवें वेतन आयोग (Seventh Pay Commission) की सिफारिशों को मंजूरी दी थी और 1 जनवरी 2016 से 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया था. लेकिन, भत्तों के साथ कई मुद्दों पर असहमति होने की वजह से इन सिफारिशें पूरी तरह से लागू नहीं हो पाईं.
जानकारी के लिए बता दें कि सातवां वेतन आयोग से पहले केंद्रीय कर्मचारी 196 किस्म के अलाउंसेस के हकदार थे. लेकिन सातवें वेतन आयोग ने कई अलाउंसेस को समाप्त कर दिया या फिर उन्हें मिला दिया जिसके बाद केवल 55 अलाउंस बाकी रह गए. तमाम कर्मचारियों को कई अलाउंस समाप्त होने का मलाल है. क्योंकि कई अलाउंस अभी तक लागू नहीं हुए और कर्मचारियों को उसका सीधा लाभ नहीं मिला है तो कर्मचारियों को लग रहा है कि वेतन आयोग की रिपोर्ट अभी लागू नहीं हुई.
अब तक 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी के बाद उठे सवालों के समाधान के लिए सरकार की ओर से तीन समितियों के गठन का ऐलान किया गया था. सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में अलाउंस को लेकर हुए विवाद से जुड़ी एक समिति, दूसरी समिति पेंशन को लेकर और तीसरी समिति वेतनमान में कथित विसंगतियों को लेकर बनाई गई थी.
सबसे अहम समिति विसंगतियों को लेकर बनाई गई है. इस एनोमली समिति का नाम दिया गया है. इसी समिति के पास न्यूनतम वेतनमान का मुद्दा भी है. चतुर्थ श्रेणियों के कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान का मुद्दा भी इस तीसरी समिति का पास है. यही समिति न्यूनतम वेतनमान को बढ़ाने की मांग करने वाले कर्मचारी संगठनों से बात कर रही है. वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया है. समिति में छह मंत्रालयों के सचिव शामिल हैं.
उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों की ओर कर्मचारी संगठन ने मांग की है कि एचआरए को पुराने फॉर्मूले के आधार पर तय किया जाए. संगठन ने सचिवों की समिति से कहा है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस को महंगाई के हिसाब से रेश्नलाइज किया जाये. संगठन ने सरकार से यह मांग की है कि बच्चों की शिक्षा के लिए दिया जाने वाले अलाउंस को कम से कम 3000 रुपये रखा जाए. संगठन ने मेडिकल अलाउंस की रकम भी 2000 रुपये करने की मांग की है. संगठन ने सरकार से यह भी कहा है कि कई अलाउंस जो सातवें वेतन आयोग ने समाप्त किए हैं उनपर पुनर्