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Thursday, 4 May 2017

बीटीसी दाखिले में आरक्षण खत्म करने का प्रस्ताव, एससीईआरटी ने कहा शिक्षकों की भर्ती में महिला-पुरुष व कला-विज्ञान के आरक्षण का प्रावधान अब नही

बीटीसी दाखिले में आरक्षण खत्म करने का प्रस्ताव, एससीईआरटी ने कहा शिक्षकों की भर्ती में महिला-पुरुष व कला-विज्ञान के आरक्षण का प्रावधान अब नही

Wednesday, 3 May 2017

निरहुआ क्रन्तिकारी 'विद्रोही' की याचियों और शिक्षामित्रों पर दो टूक

निरहुआ क्रन्तिकारी 'विद्रोही' added 4 new photos — with Ganesh Dixit and 5 others .
>>> याचियों और शिक्षामित्रों पर दो टूक <<<
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साथियों !
आज शिक्षामित्रों के समायोजन का मामला 'ज्यूडिशियल स्लाटर हाउस ऑफ़ सुप्रीम कोर्ट' के कसाई के रूप में त्वरित एवं कठोर न्यायपरक निर्णय लेने के लिए विख्यात जस्टिस आदर्श कुमार गोयल जी के समक्ष लगभग पूरे दिन रखा गया,,, देश के टॉप टेन लॉयर्स द्वारा शिक्षामित्रों के समायोजन को वैध साबित करने हेतु तमाम प्रकार के मानवीय पहलुओं,दलीलों,विशेषाधिकारों और भ्रामक सूचनाओं को आधार बनाकर पेश किये जाने के बाबजूद कोर्ट का रुख इन सबसे इतर असहमत ही रहा,,,किन्तु बड़े वकीलों ने जिस तरह दिनभर गोल-गोल जलेबी बनाते हुए जस्टिस गोयल साहब को इस तरह प्रभावित किया है कि कार्यवाही खत्म होने तक जस्टिस गोयल साहब किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँच पाये जबकि इनके पिछले रिकार्ड को देखा जाय तो यह उनकी कार्यशैली से कतई अलग है,,,आज दिनभर की कार्यवाही को देखते हुए मेरा अनुभव यह कहता है कि कहीं ना कहीं अब याची बन्धुओं के लिए खतरे की घण्टी तैयार हो रही है,,,एक न्यायाधीश जब मानवीय पहलुओं पर सोचना शुरू करता है तो नैचुरल जस्टिस के अधीन सब कुछ उसके दायरे में आने लगता है,,,यहाँ मुकाबला अब 15 साल से रोजी रोटी का प्रश्न बनाये डेढ़ लाख परिवारों और
याचियों (जिन्हें अभी विभाग द्वारा ना कोई आश्वासन और ना कोई नियुक्ति मिली है) उनके बीच का है,,,शिक्षामित्रों को बाहर किये जाने का मतलब होगा कि उनसे उनकी रोटी 'छीनी' गयी जबकि याचियों को अभी रोटी मिली ही नहीं तो छीने जाने का प्रश्न ही नहीं बनता,,,,आज की सुनवायी को अपने मनमुताबिक प्रस्तुत कर याची नेता भले ही क्षणिक वाहवाही लूट रहे हों लेकिन यह कठोर सत्य है कि जस्टिस गोयल साहब जैसे जज की बेंच में लगातार दो दिन की सुनवाई में खुद के समायोजन को निरस्त करने वाले आदेश को रोक लेना ही शिक्षामित्रों के लिए आधी से ज्यादा फतेह मानी जायेगी,,, याची साथियों के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है लेकिन अगर जॉब ना मिली तो मेरी इस सहानुभूति को लेकर कोई ओढ़ेगा या दसायेगा ??
याची साथियों !!
समय बहुत कम और विकट है,,,अपने-अपने पैरवीकारों के हाथ मजबूत कीजिये और उनपर दबाव बनाइये कि आपकी बारी आने पर मजबूती से पक्ष रखें अन्यथा यह निश्चित है कि शिक्षामित्रों का समायोजन वैध करार होने की दशा में याची लाभ असम्भव हो जाएगा,,,जो साथी इस खुशफहमी में हैं कि शिक्षामित्रों के आधार पर उन्हें भी नियुक्ति लाभ मिल जायेगा तो वे सरासर गलत दिशा में सोच रहे हैं, बी0टी0सी0 अभ्यर्थी भी लाइन में लगे हैं और उनका भी अपना पक्ष है,अतः बिना सीट वैकेंट किये आपको शामिल करना मजश्किल ही नहीं नामुमकिन है,,अमूमन मैं याची साथियों के लिए कभी लिखता नहीं किन्तु आज इन याची साथियों का लंबा संघर्ष अंत समय की परीक्षा घड़ी में दिशाहीन हुआ जा रहा है अतः मन के आवेग को रोकना मुश्किल हो उठा है,,,लगातार सुनवाई सिर्फ शिक्षामित्र मामले की ही नहीं बल्कि अन्य मामलों की भी होगी अतः कल भर का समय और बाकी है वक्त मुकाबले का है,करो या मरो का है,,, जेठमलानी और सिब्बल के मुकाबले कोई दमदार महारथी उतारिये मैदान में और पूरी तैयारी से उतारिये अन्यथा बाद में यही कहेंगे कि -''हाथ को आयी लेकिन मुँह ना लगी",,,,
खुशफहमी पालने के और भी मंजर आएँगे लेकिन आज मुझे गलत बताने से पहले याची भाई अपने-अपने पैरवीकारों की सुनें और उनके हाथ बेशक जल्द मजबूत करें,,,जय हिंद।।

UPTET SHIKSHA MITRA: Next Date 5 May

आज की सुनवाई खत्म,
शुक्रवार, सोमवार, मंगलवार तीनो दिन आफ्टर 2pm केस सुना जायेगा।
बाकी अपडेट बाद में

Tuesday, 2 May 2017

आज की सुनवाई का हाल गणेश दीक्षित की कलम से


आज की सुनवाई का हाल गणेश दीक्षित की कलम से

साथियों,
शत् शत् वन्दे ईश नमन्
आज सुबह 11.30 कोर्ट बैठी।अपना मामला 11.45 सीरियल नम्बर 20 पर टेकअप हुआ।सबसे पहला नीरज राय का PG बेस स्टार्ट हुआ जिसमे सीनियर एडवोकेट वी.मोहना जी ने बहुत अच्छी बहस की और PG बेस के 160 की संख्या को लाभान्वित किया।
इसके बाद शिक्षामित्र 12.45 पर केस स्टार्ट हुआ।लंच के बाद शिक्षामित्र लगातार चलता रहा।शिक्षामित्र की तरफ से सबसे पहले स्टेट की तरफ से AAG ने बहस किया।जस्टिस यू.यू.ललित और ए.के.साहेब पूरी तरह से तैयारी से थे।जस्टिस यू.यू.ललित ने कहा 1999 आपको 10,000 पदों के लिए आपने रिलक्सेशन लिया और वो पद बढ़कर 1,72000 कैसे हो गए और आपने सबका समायोजन भी कर दिया।आपने खुली प्रतियोगिता के द्वारा सबको अवसर देकर पदों को क्यों नही भरा?उसके बाद हाईकोर्ट डी.वाई.चंद्रचूड़ के ऑर्डर को कोर्ट में पढा गया जिस ऑर्डर के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्टेट का ध्यान केंद्रित कराया गया जिसपर स्टेट कोई जवाब देने पर असमर्थ था।तब श्री यू.यू.ललित साहेब ने कहा कि आप खुली प्रतियोगिता के द्वारा इन सभी पदों को क्यो नही भर रहे?इसके बाद शिक्षामित्र की तरफ से रामजेठमलानी और कपिल सिब्बल ने भी बहस की किन्तु कोर्ट उनसे भी असन्तुष्ट रही।साथियों यह तो निश्चित हैं योग्यता का सम्मान करते हुए ncte के नार्म्स को फुलफिल करने वाले योग्य अभ्यर्थियों से प्रदेश के सभी पदों को भरा जाएगा।कल पुनः शिक्षामित्र केस लगातार लगा है,इसके अतिरिक्त AOR अमित पवन के द्वारा यह भी ज्ञात हुआ कि वर्गीकरण का मुद्दा मेंशन कराया गया जिसको कल शिक्षामित्र मामले के बाद सुनने के लिए कहा गया।इसकी पूरी डिटेल्स ज्ञात होते ही आपको सूचित किया जाएगा।
"सन्घेय शक्ति सर्वदा"
आपका गणेश शंकर दीक्षित
टी ई टी संघर्ष मोर्चा उ.प्र.

हाइकोर्ट के आर्डर को पढ़ कर जज बोले कि ट्रेंड लोगों के होते हुए अनट्रेंड को क्यों ट्रेनिंग दी

हाइकोर्ट के आर्डर को पढ़ कर जज बोले कि ट्रेंड लोगों के होते हुए अनट्रेंड को क्यों ट्रेनिंग दी

Ganesh Dixit >>>

चंद्रचूड़ जी के ऑर्डर को पढ़कर गोयल सर सख्त ,बोले जब ट्रेण्ड लोग थे तो अनट्रेण्ड को क्यों ट्रेनिंग दी ?,उत्तराखंड के ऑर्डर को भी नकारा ,कहा यूपी में काफी लोग ट्रेण्ड हैं

सोशल मीडिया पर आज की सुनवाई को ले कर एक शिक्षामित्र की राय

Shahnawaz Khan Uppsms added 2 new photos — with Gazi Imam Ala and 12 others.  >>>
*स्थिति तनावपूर्ण किन्तु नियंत्रण में।*
आज की सुनवाई में खास खास:- शिक्षामित्रों का पूरा मामला आज कोर्ट के इस सवाल पर आ कर अटक गया कि यदि शिक्षामित्र पिछले दरवाजे से शिक्षक नही बनाये गए हैं तो समायोजन के विज्ञापन में बीएड व बीटीसी को क्यो शामिल नही किया गया? दूसरा बड़ा सवाल राज्य में कितनी रिक्तियां है? और तीसरा सवाल शिक्षामित्र कब कब और कितनी संख्या में नियुक्त हुए?
उपरोक्त सामान्य से सवालो का जवाब राज्य के (कथित टेट धारकों की slp पर उनकी ओर से पूर्व लड़ चुके) महाधिवक्ता अजय मिश्र नही दे सके और न ही नोडल अधिवक्ता ही। इस सब के बाद सुनवाई अगले दिन के लिए जारी रखी गयी। अहसास होता है कि कहीं राज्य की डबल क्रॉस की नीति तो नहीं। दोनो संघ राज्य के अधिवक्ता पर कोई दवाब नही बना सके हैं, r वेंकट रमणी को नही बोलने दिया अजय कुमार मिश्र ने, केके वेणुगोपाल राज्य की तरफ से अपीयर नही हुए। कुल मिलाकर स्थिति तनाव पूर्ण किन्तु नियंत्रण में है। अगर समायोजन निरस्त होगा तो संगठनों की लापरवाही और राज्य की लचर पैरवी से होगा। 
अभी भी समय है उपरोक्त तथ्यों को लेकर संघ पर आम शिक्षामित्र दवाब बनाएं।
*सुनवाई कल भी जारी रहेगी, अगर राज्य मज़बूत पैरवी करता है तो जीत होगी अन्यथा समस्या तो है ही।* उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ और अन्य सुप्रीम कोर्ट ग्रुप के अधिवक्ता और अन्य टीमों के अधिवक्ता कल अपना मज़बूत पक्ष रखेंगे। हालांकि आज भी शन्ति भूषण, कोलिन गोंसाल्विस, और शांति भूषण आदि ने अच्छी बहस की।
केस बिना हमें सुने निर्णीत तो नही होगा लेकिन कुछ सवालों के जवाब सिर्फ राज्य को ही देना होंगे। बिना जवाब दिए काम नही चलने वाला। राज्य की लचर पैरवी के कारण बात बिगड़ी जबकि कोर्ट नियुक्त शिक्षकों को अभी भी यथावत रखने के पक्ष में थी। अगर कल राज्य ने बात संभाल ली तो ये संभव हो सकेगा।।

नौकरी पर संकटः SC का यूपी के 1.75 लाख शिक्षामित्रों को हटाने का संकेत

Shakul Gupta
नौकरी पर संकटः SC का यूपी के 1.75 लाख शिक्षामित्रों को हटाने का संकेत

नई दिल्ली श्याम सुमन
LAST UPDATED: 2 मई, 2017 6:57 PM
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यूपी में शिक्षण कार्य कर रहे पौने दो लाख शिक्षामित्रों को हटाकर उन्हें नए सिरे से भर्ती करने का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि नई भर्ती होने तक मौजूदा शैक्षणिक सत्र तक शिक्षामित्रों को कार्य करने दिया जाएगा और जैसे ही नई भर्ती संपन्न होगी उन्हें उससे बदल दिया जाएगा।
जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने मंगलवार को ये टिप्पणियां तब की जब यूपी के एएजी अजय कुमार मिश्रा और नलिन कोहली ने कहा कि यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट के फैसले को कोर्ट सही मान रही है तो हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन हम 22 सालों से काम कर रहे पौने दो लाख लोगों का क्या करेंगे। कोर्ट ने कहा कि इसका समाधान हम बताएंगे।
पीठ ने कहा कि आप छह माह के अंदर नई भर्ती कीजिए। इस भर्ती को दिसंबर तक पूरा कीजिए। ऑनलाइन आवदेन सिस्टम से यह संभव है। इसके बाद अगले वर्ष मार्च तक नियुक्तियां कीजिए। तब तक शिक्षामित्रों को अध्यापन करने दीजिए। उन्हें इस भर्ती में बैठने का पूरा अधिकार होगा, उनके लिए उम्रसीमा का बंधन नहीं होगा, क्योंकि वह पहले से पढ़ा रहे हैं। जहां तक उन्हें दी जाने वाली वरिष्ठता का सवाल है तो यूपी सरकार नियम बनाकर उसे तय कर सकती है। इसमें कोई समस्या नहीं है।
नियुक्तियां असंवैधानिक
कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्तियां संवैधानिक के खिलाफ हैं क्योंकि आपने बाजार में मौजूद प्रतिभा को मौका नहीं दिया और उन्हें अनुबंध पर भर्ती करने के बाद उनसे कहा कि आप अनिवार्य शिक्षा हासिल कर लो। पीठ ने कहा कि यह बैकडोर एंट्री है जिसे उमादेवी केस (2006) में संविधान पीठ अवैध ठहरा चुकी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश को स्टे कर दिया था।
दूरदराज शिक्षा देने के लिए की थी भर्ती
यूपी सरकार ने कहा कि 1999 में शिक्षामित्रों की भर्ती प्रदेश के दूरदराज केक्षेत्रों में बालकों को बेसिक शिक्षा देने के लिए की गई थी। यह एक कल्याणकारी कदम था जिसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि 22 साल से चल रही यूपी सरकार की इस नीति को चुनौती नहीं दी है। जिन्होंने चुनौती दी है उनकी संख्या लगभग 200 है और उन्हें सरकार नौकरी में लेने को तैयार है।
अच्छी मंशा आंखों का धोखा है
कोर्ट ने कहा हम मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं हम यह पूछ रहे हैं कि आपने शिक्षामित्रों को योग्यता शिक्षा हासिल (बीएड,बीटीसी, दूरस्थ बीटीसी और टीईटी) करने के लिए किस नियम के तहत अनुमति दी। क्या आपने इसके लिए कोई विज्ञापन निकाला था क्या कोई चयन प्रक्रिया तय की थी। आपकी कल्याणकारी मंशा कुछ नहीं, आंखों का धोखा मात्र है, आपने नियमों के विरुद्ध भर्ती की है। जस्टिस ललित ने पूछा आप इस नतीजे पर किस आधार पर पहुंचे कि प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों की जरूरत है और आपने मार्केट में मौजूद प्रतिभा को महरूम कैसे किया। क्या इसे निष्पक्ष प्रतियोगिता कहा जा सकता है। आप कह रहे हैं इसे किसी ने चुनौती नहीं दी। जब तक ये अनुबंध था किसी को समस्या नहीं थी लेकिन जब आप नियमित करने लगे तक समस्या हुई। बिना विज्ञापन आप नियमित कैसे कर सकते हैं।
कोर्ट मामले को आज की समाप्त करना चाहता था लेकिन कुछ शिक्षामित्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने वह कुछ बहस करेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को बचकाना बताया और कहा कि उन्होंने यह नहीं देखा कि शिक्षामित्र रखने को उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा देना था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसला देते समय एक भी शिक्षामित्र को नोटिस नहीं दिया था। कोर्ट का समय पूरा होने के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी इसलिए कोर्ट ने मामला कल तक के लिए स्थगित कर दिया।

कल भी होगी शिक्षामित्रों की सुनवाई

ब्रेकिंग न्यूज  :--
कल भी होगी सुनवाई । UPPSMS के समस्त जिलाध्यक्ष सकारात्मक सोच के साथ सकारात्मक परिणाम की आशा में
तत्काल न्यायिक शुल्क सगंठन को उपलब्ध कराएँ ।
By गाजी इमाम आला
प्रान्तीय अध्यक्ष
UPPSMS
एवं
SSSAUP

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Ganesh Dixit >>
Case kal continue tomorrow...
जज साहब ने sm /bed /btc सभी को खुली प्रतियोगिता के द्वारा मौका देने कि बात कही

Hearing tomorrow11.30 am

Himanshu Rana >>

हियरिंग कल भी कंटिन्यू रहेगी , शिक्षामित्र से ही पुनः सुना जाएगा |
धन्यवाद
हर हर महादेव

आपका_हिमांशु राणा

02 मई की अतिसंवेदनशील सुनवाई में संघ टीम के सीनियर कॉउंसिल्स का पैनल

⚓ *02 मई की अतिसंवेदनशील सुनवाई में संघ टीम के सीनियर कॉउंसिल्स का पैनल:*

सुप्रीमकोर्ट में 02 मई की जस्टिस गोयल जी और जस्टिस ललित जी की खंडपीठ की महत्वपूर्ण सुनवाई में संघ टीम की लगातार 3 दिनों की अटूट मेहनत से निम्न सीनियर्स कॉउंसिल्स पैनल का गठन किया....

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💥 *1. Senior Adv.- V. Shekhar*
💥 *2. Senior Adv.- Nidesh Gupta*
💥 *3. Senior Adv V. Giri*
    (Specialist indian constitution)
💥 *4. Senior Adv.- Vikas Pahwa*
💥 *5. Senior Adv.-Ravinder Sethi*
💥 *6. Senior Adv.- Nagendra Rai*
      (Retired justice)
💥 *7. Adv -R.K. Singh*
💥 *8. AOR & Adv -P. Sajith*
💥 *9.AOR & Adv.- swarupma chaturvedi*

टीम अपनी तैयारी से सभी अकादमिक साथियो को जीत के प्रति आश्वस्त करती है।
हमारी निम्न याचिकाएं अकादमिक भर्तियों की जीत का मील का पत्थर साबित होंगी ।

👇

📗 *SLP- 1980/17, KRISHNA MOHAN SINGH & ORS. VS STATE OF UP & OTHERS*
(15 वे और 16 वे संसोधन की पुनर्बहाली & मानवाधिकार विशेष)

📗 *SLP- 1725/17, SITARAM & ORS. VS STATE OF UP & ORS.*
(NCTE की 11 फरवरी 11 की अधिसूचना 9बी पर चुनौती)

📗 *SLP- 2932/17, AJAY TRIPATHI & ORS VS STATE OF UP & ORS.*
(15वे और 16 वे अमेंडमेंट से हुई समस्त बी टी सी भर्ती की विधिक जीत के सापेक्ष)

अंतिम विजय तक हम अपनी इसी विचार धारा के साथ लड़ेंगे....
*★आजीविका और मान सम्मान से कोई समझौता नही।*

®मिशन सुप्रीम कोर्ट & संघ टीम

Monday, 1 May 2017

सीटेट अब साल में सिर्फ एक ही बार

सीटेट अब साल में सिर्फ एक ही बार

क्या है सीटेट1’राजकीय और निजी विद्यालयों में प्राथमिक या प्रशिक्षित शिक्षक बनने के लिए सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट या सीटेट उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। 1’मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने 2010 में एक सूचना जारी कर शिक्षकों की भर्ती के लिए इसे अनिवार्य कर दिया था। 1’इस समय साल में दो बार सीटेट का आयोजन होता है। सितंबर और फरवरी में यह परीक्षा होती है। एक माह पहले इसके लिए आवेदन भरा जाता है। 1’फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नई व्यवस्था लागू होने पर कौन-से महीने में इस परीक्षा का आयोजन होगा।

नई दिल्ली, प्रेट्र : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अब साल में सिर्फ एक बार सीटेट का आयोजन करेगा। पहली कक्षा से आठवीं तक के शिक्षकों की भर्ती के लिए इस समय साल में दो बार केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया जाता है। सीबीएसई ने मानव संसाधन विकास मंत्रलय को अपने फैसले की जानकारी दे दी है। बोर्ड का कहना है कि जेईई-मेन और नीट सहित कई अन्य परीक्षाओं के चलते उस पर बहुत ज्यादा बोझ बढ़ गया है। हाल ही में बोर्ड ने कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए होने वाले नेट का आयोजन साल में एक बार करने का प्रस्ताव भी रखा है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब सभी बड़ी प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन साल में सिर्फ एक बार किया जाता है, तो फिर सीटेट या नेट क्यों दो बार आयोजित होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि इन परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्र बैठते हैं। इसलिए इनके आयोजन के लिए बहुत ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है। इसके अलावा साल में दो बार होने से परीक्षार्थियों की गंभीरता भी प्रभावित होती है। दो बार परीक्षा होने से उनको समय व्यर्थ होने का डर नहीं रहता है। इसलिए मानव संसाधन विकास मंत्रलय और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से विचार-विमर्श करने के बाद सीबीएसई ने साल में एक बार ही सीटेट का आयोजन करने का फैसला लिया है।